कुरान - 26:83 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

83
رَبِّ هَبۡ لِي حُكۡمٗا وَأَلۡحِقۡنِي بِٱلصَّـٰلِحِينَ

Transliteration: (Rabbi hab lee hukmanw wa alhiqnee bis saaliheen)

ऐ मेरे रब! मुझे हिकमत (इल्म व अमल) अता फ़रमा [88] और मुझे नेकों (सालेहीन) के साथ मिला दे [89]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 83 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 83

"ऐ मेरे रब! मुझे हिकमत अता फ़रमा [88] और मुझे नेकों के साथ मिला दे [89];"

[88] 'हुक्म' यानी कामिल हिकमत और मअरिफ़त की दुआ

हज़रत इब्राहीम ने दुआ मांगी कि ऐ अल्लाह! मुझे दीन व शरीअत का कामिल इल्म, हिकमत और हक़ फ़ैसले करने की सलाहियत अता फ़रमा।

[89] सालेहीन और मुक़र्रबीन की रिफ़ाक़त

और मुझे दुनिया व आख़िरत में अपने सालेह, मुक़र्रब और कामिल बन्दों की जमाअत में शामिल फ़रमा। इससे साबित हुआ कि कामिल मोमिन भी नेक बन्दों की सोहबत और उनके साथ हश्र की दुआ मांगते हैं।

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