कुरान - 26:87 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
وَلَا تُخۡزِنِي يَوۡمَ يُبۡعَثُونَ

Transliteration: (Wa laa tukhzinee Yawma yub'asoon)

और मुझे उस दिन रुसवा न फ़रमाना जिस दिन सब लोग दोबारा उठाए जाएंगे [93]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 87

"और मुझे उस दिन रुसवा न फ़रमाना जिस दिन सब लोग दोबारा उठाए जाएंगे [93];"

[93] यौम-ए-हश्र की रुस्वाई से पनाह

क़ियामत का दिन बड़ा ही पुर-हौल दिन होगा जब तमाम मख़्लूक़ के ऐब और आमाल सामने आ जाएंगे। हज़रत इब्राहीम ने दुआ की कि ऐ अल्लाह! उस भारी दिन मुझे तमाम मख़्लूक़ के सामने इज़्ज़त और सुर्खरूई अता फ़रमाना और रुस्वाई से बचाना।

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