Transliteration: (Yawma laa yanfa'u maalunw wa laa banoon)
"जिस दिन न कोई माल काम आएगा और न ही औलाद [94];"
क़ियामत के दिन दुनिया का जमा किया हुआ कोई माल, ख़ज़ाना या रुपया-पैसा किसी इंसान को अज़ाब से नहीं बचा सकेगा, और न ही बेटे, रिश्तेदार या क़बीला कोई मदद कर सकेंगे। हर इंसान अपनी जान की फ़िक्र में मुब्तला होगा ('यौमा यफ़िर्रुल मरु मिन अख़ीह')।
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