कुरान - 81:29 सूरह अत-तक्वीर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
وَمَا تَشَآءُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maa tashaaa'oona illaaa ai yashaaa 'al laahu Rabbul 'Aalameen)

29. और आप कुछ नहीं चाह सकते मगर जो अल्लाह [24], सारे जहान का परवरदिगार, चाहता है [25]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तक्वीर आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

24.अल्लाह की मर्ज़ी सबसे ऊपर (The Will of Allah Above All)

"और तुम नहीं चाह सकते, सिवाय इसके कि अल्लाह, सारे जहान का परवरदिगार (चाहे)।" (सूरह अत-तकवीर: 29)

अल्लाह की मर्ज़ी के आगे इंसानी इरादे (Human Will Under Allah’s Decree)

  1. इस आयत में बताया गया है कि:
  • हमारी ख्वाहिशें और इरादे, अल्लाह की मर्ज़ी के मातहत होते हैं।
  • अल्लाह के हुक्म, इरादा और पसंद में फर्क़ होता है।

25.इस आयत से मिलने वाली 5 अहम बातें (5 Key Insights from This Verse)

  1. इंसान की आज़ादी: इंसान को कुछ हद तक अपने आमाल में इख़्तियार दिया गया है, लेकिन आख़िरकार वही होता है जो अल्लाह चाहता है।
  2. अल्लाह की मर्ज़ी के ताबे: इंसान के पास इख़्तियार है, मगर वो मुकम्मल तौर पर आज़ाद नहीं, बल्कि अल्लाह की मर्ज़ी के मातहत है।
  3. दुनिया का निज़ाम: दुनिया का हर मामला अल्लाह की मर्ज़ी से होता है, भले ही वो उसकी पसंद के मुताबिक़ न हो।
  4. नेकी की हिदायत: अल्लाह इंसानों को बुराई की तरफ़ नहीं झुकाता, बल्कि उन्हें उससे बचाता है।
  5. शैतान का फ़रेब: अल्लाह भलाई की तरफ़ बुलाता है, जबकि इब्लीस इंसान को ग़लत रास्ते पर डालने की कोशिश करता है।

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