Transliteration: (Wa maa huwa 'alal ghaibi bidaneen)
"और वह (मुहम्मद ﷺ) ग़ैब को बयान करने में कोई बुख़्ल (कंजूसी) नहीं करते।" (सूरह अत-तकवीर: 24)
सख़ावत (उदारता) उसी के लिए कही जाती है जो किसी क़ीमती चीज़ का मालिक हो और उसे दूसरों तक पहुँचाए। जब कुरआन नबी करीम ﷺ को ग़ैब बयान करने में सख़ावत वाला बता रहा है, तो यह साबित करता है कि आप ﷺ को इलाही इल्म दिया गया था और आपने उसे अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ साझा किया।
इस संदर्भ में ग़ैब का मतलब यह है:
कुछ लोग हदीस-ए-क़िर्तास का हवाला देकर यह दावा करते हैं कि नबी करीम ﷺ ने अपने मिशन को मुकम्मल नहीं किया, लेकिन यह सोच ग़लत है, क्योंकि:
1. नबी करीम ﷺ को इल्म-ए-ग़ैब अता किया गया
📖 "और अल्लाह ने आपको वह इल्म सिखाया जो आप नहीं जानते थे, और अल्लाह का आप पर बड़ा फ़ज़्ल (कृपा) है।"
📖 (सूरह अन-निसा: 113)
🔹 यह आयत साबित करती है कि नबी करीम ﷺ को अल्लाह ने ख़ास इल्म अता फ़रमाया, जो आम इंसानों को हासिल नहीं।
📖 "यह (कुरआन) ग़ैब की ख़बरों में से है, जिसे हम आपकी तरफ़ वह़ी (प्रकाशना) कर रहे हैं। इससे पहले न तो आप इसे जानते थे और न आपकी क़ौम।"
📖 (सूरह हूद: 49)
🔹 यह बयान करता है कि अल्लाह ने नबी करीम ﷺ को ग़ैब की ख़बरें दीं, जो आप ﷺ और आपकी क़ौम को पहले मालूम न थीं।
📖 "वह ग़ैब को जानता है और अपने ग़ैब पर किसी को हावी नहीं करता, सिवाय उस रसूल के जिसे वह पसंद करे।"
📖 (सूरह अल-जिन: 26-27)
🔹 इस आयत से साबित होता है कि अल्लाह तआला ग़ैब का इल्म अपने पसंदीदा रसूलों को देता है।
2. नबी करीम ﷺ को दी गई ग़ैब की ख़बरें
📖 "ऐ लोगों! मैं अल्लाह का रसूल हूँ, जो आसमानों और ज़मीन की बादशाहत का मालिक है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वही ज़िंदा करता और मारता है।"
📖 (सूरह अल-आराफ़: 158)
🔹 इसमें अल्लाह ने नबी करीम ﷺ को अपने इल्म और ताक़त की ख़बर दी, जिससे नबी ﷺ ने उम्मत को आगाह किया।
📖 "ये आपसे पूछते हैं कि क़यामत कब आएगी? कह दीजिए कि उसका इल्म सिर्फ़ मेरे रब के पास है।"
📖 (सूरह अल-आ'राफ़: 187)
🔹 नबी करीम ﷺ को यह ग़ैब मालूम था कि क़यामत का इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है, और यह इल्म भी आपको अल्लाह ने अता फ़रमाया।
3. दूसरे अंबिया (पैग़म्बरों) को भी इल्म-ए-ग़ैब दिया गया
📖 "और जब मरयम के फ़रिश्तों ने कहा: ऐ मरयम! बेशक अल्लाह तुझे अपने एक कलिमा (ईसा) की बशारत देता है।"
📖 (सूरह आले-इमरान: 45)
🔹 हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश की ख़बर मरयम (अलैहिस्सलाम) को पहले से दी गई, जो इल्म-ए-ग़ैब की मिसाल है।
📖 "और हमने दाऊद और सुलेमान को इल्म अता किया।"
📖 (सूरह अन-नम्ल: 15)
🔹 हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को जिन्नात और पशुओं की भाषा समझने का ग़ैबी इल्म दिया गया।
📖 "जब यूसुफ़ ने अपने वालिद से कहा: ऐ अब्बा! मैंने (ख़्वाब में) ग्यारह सितारे, सूरज और चाँद को देखा, मैंने देखा कि वे मुझे सज्दा कर रहे हैं।"
📖 (सूरह यूसुफ़: 4)
🔹 हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को इल्म-ए-ग़ैब के ज़रिए पहले ही अपने भविष्य की जानकारी दे दी गई थी।
इन आयात से यह साबित होता है कि अल्लाह तआला अपने चुनिंदा नबियों को ग़ैब का इल्म अता करता है, ख़ास तौर पर नबी करीम ﷺ को ग़ैब की तमाम ख़बरें दी गईं, जिनमें गुज़रे हुए और आने वाले वाक़ियात, जन्नत, जहन्नम, और क़यामत की हक़ीक़तें शामिल हैं।
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