कुरान - 81:22 सूरह अत-तक्वीर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَمَا صَاحِبُكُم بِمَجۡنُونٖ

Transliteration: (Wa maa saahibukum bimajnoon)

22.और आपका रफ़ीक़ हरगिज़ दीवाना नहीं है [18]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तक्वीर आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

नबी करीम ﷺ की दिव्य सुरक्षा और सच्चाई (The Divine Protection and Truthfulness of the Holy Prophet ﷺ)

"और तुम्हारे साथी (नबी) बिल्कुल भी पागल नहीं हैं।" (सूरह अत-तकवीर: 22)

नबियों की पागलपन से सुरक्षा (The Protection of Prophets from Insanity)

  1. यह आयत नबियों की प्रकृति से जुड़ी एक मौलिक सच्चाई को स्थापित करती है:
  • कमियों से सुरक्षा: नबियों को अल्लाह की ओर से पागलपन, गूंगापन और बहरापन जैसी कमियों से सुरक्षित रखा जाता है, क्योंकि ये कमियाँ अल्लाह के संदेश के प्रसार में बाधा बन सकती थीं।
  • पूर्ण मानसिक और शारीरिक क्षमताएँ: चूँकि नबियों को दिव्य संदेश पहुँचाने के लिए चुना जाता है, उन्हें पूर्ण बुद्धि, वाणी और श्रवण शक्ति प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने मिशन को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें।

नबी करीम ﷺ के विरुद्ध आपत्तियों का अल्लाह द्वारा उत्तर (Allah’s Response to Objections Against the Holy Prophet ﷺ)

  • झूठे आरोपों का खंडन: काफ़िरों ने नबी करीम ﷺ पर पागलपन का झूठा आरोप लगाया था। अल्लाह तआला स्वयं इस दावे को असत्य ठहराते हुए नबी की हिकमत और सच्चाई की पुष्टि करता है।
  • अल्लाह अपने रसूल का बचाव करता है: नबी करीम ﷺ के विरुद्ध उठाए गए हर आपत्ति का उत्तर खुद अल्लाह तआला देता है, जो उनके पैग़म्बरी मिशन की सच्चाई को साबित करता है।

अल्लाह तआला और नबी करीम ﷺ की पारस्परिक गवाही (The Mutual Witnessing of Allah Almighty and the Holy Prophet ﷺ)

  • "क़ुल" कहने का हुक्म: जब अल्लाह के बारे में कोई आपत्ति उठाई जाती है, तो नबी करीम ﷺ को आदेश दिया जाता है कि वे उसकी ओर से उत्तर दें। यही कारण है कि कई कुरआनी आयतें "क़ुल" (कहो) से शुरू होती हैं—क्योंकि नबी करीम ﷺ अल्लाह की सच्चाई के गवाह हैं।
  • पारस्परिक गवाही: जिस तरह नबी करीम ﷺ अल्लाह की तौहीद और उसके संदेश की गवाही देते हैं, उसी तरह अल्लाह भी अपने नबी की सच्चाई की गवाही देता है।
  • गवाह को पूर्ण ज्ञान और ज़िम्मेदारी होती है: एक सच्चे गवाह के पास अपने दावे के बारे में पूर्ण ज्ञान और ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। नबी करीम ﷺ, अल्लाह के संदेश के सर्वोच्च गवाह होने के नाते, अपनी नबूवत के मिशन में पूरी तरह से जागरूक और सुनिश्चित हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now