कुरान - 39:36 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِكَافٍ عَبۡدَهُۥۖ وَيُخَوِّفُونَكَ بِٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦۚ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٖ

Transliteration: (Alaisal laahu bikaafin 'abdahoo wa yukhawwi foonaka billazeena min doonih; wa mai yudlilil laahu famaa lahoo min haad)

क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफ़ी नहीं है [89]? और वे आपको उसके सिवा दूसरों से डराते हैं [90], और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे तो उसका कोई हिदायत करने वाला नहीं [91] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 36

"क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफ़ी नहीं है [89]? और वे आपको उसके सिवा दूसरों से डराते हैं [90], और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे तो उसका कोई हिदायत करने वाला नहीं [91] ।"

[89] 'अब्दुहू'—हुज़ूर ﷺ के लिए अल्लाह की किफ़ायत

यहाँ 'बंदे' से मुराद हुज़ूर ख़ातमुन्नबिय्यीन सैयदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क्या अल्लाह अपने हबीब की हिफ़ाज़त, मदद और नुसरत के लिए काफ़ी नहीं? बेशक अल्लाह ही तमाम कायनात का ख़ालिक़ व मालिक है और वह अपने प्यारे हबीब की हर आन निगहबानी फ़रमाता है।

[90] बुतों और बातिल माबूदों का बेबुनियाद ख़ौफ़

कुफ़्फ़ार-ए-मक्का हुज़ूर ﷺ को अपने बुतों (लात, उज़्ज़ा, मनात वग़ैरह) से डराते थे कि अगर आप हमारे बुतों की बुराई बयान करेंगे तो वे आपको नुक़सान पहुँचा देंगे या दीवाना बना देंगे। अल्लाह ने उनकी इस जिहालत को बेनक़ाब फ़रमाया कि जो बुत अपनी मक्खी तक नहीं उड़ा सकते, वे किसी का क्या बिगाड़ सकते हैं!

[91] गुमराहों के लिए कोई रहनुमा नहीं

जिस शख़्स की हठधर्मी और तकब्बुर के सबब अल्लाह तआला उस पर हिदायत के दरवाज़े बंद कर दे, उसे फिर कायनात की कोई ताक़त राह-ए-रास्त पर नहीं ला सकती।

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