कुरान - 39:1 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
تَنزِيلُ ٱلۡكِتَٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡحَكِيمِ

Transliteration: (Tanzeelul Kitaabi minal laahil 'Azeezil Hakeem)

इस किताब (क़ुरआन) का नाज़िल होना उस अल्लाह की तरफ़ से है जो इज़्ज़त वाला [2], हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 1

"इस किताब (क़ुरआन) का नाज़िल होना उस अल्लाह की तरफ़ से है जो इज़्ज़त वाला [2], हिकमत वाला है।"

[2] कलाम-ए-इलाही की अज़मत और मक़ाम

यह आयत मुबारका क़ुरआन मजीद के अज़ीम तरीन मन्शअ और मक़ाम को उजागर करती है। इस मुक़द्दस किताब को नाज़िल फ़रमाने वाली ज़ात अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त है जो अल-अज़ीज़ (ग़ालिब व इज़्ज़त वाला) और अल-हकीम (हिकमत वाला) है।

जिस तरह कलाम फ़रमाने वाला अज़ीज़ है, उसी तरह इस कलाम को लाने वाले हज़रत जिब्रईल (अलैहिस्सलाम) तमाम फ़रिश्तों में अज़ीज़ व मुकर्रम हैं, और जिस मुक़द्दस ज़ात पर यह नाज़िल हुआ यानी हुज़ूर सय्यिदे आलम ﷺ, वे तमाम कायनात में सबसे अफ़ज़ल व अज़ीज़ हैं।

तफ़सीर रूहुल मआनी के मुताबिक़, कलाम की अज़मत मुतकल्लिम (कलाम करने वाले) की अज़मत के ताबे होती है। चूंकि अल्लाह तआला अज़ीज़ व हकीम है, इसलिए उसका कलाम भी बेमिसाल इज़्ज़त, हिकमत और रूहानी तासीर का हामिल है।

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