Transliteration: (Khalaqas samaawaati wal arda bilhaqq; yukawwirul laila 'alan nahaari wa yukawwirun nahaara 'alaal laili wa sakhkharash shamsa walqamara kulluny yajree li ajalim musammaa; alaa Huwal 'Azeezul Ghaffaar)
"उसने आसमानों और ज़मीन को हक़ के साथ पैदा फ़रमाया [13]; वह रात को दिन पर लपेटता है और दिन को रात पर लपेटता है [14]; और उसने सूरज और चाँद को ताबेदार बना रखा है; हर एक मुक़र्ररा वक़्त तक चल रहा है [15]; सुन लो! वही इज़्ज़त वाला, बड़ा बख़्शने वाला है [16]!"
अल्लाह ने पूरी कायनात को हिकमत और हक़ के साथ तन्हा पैदा फ़रमाया, उसे किसी शरीक या मददगार की कोई हाजत नहीं।
गर्मियों में रात का हिस्सा दिन में शामिल होकर दिन बड़ा हो जाता है, और सर्दियों में दिन का हिस्सा रात में शामिल होकर रात बड़ी हो जाती है। यह मुकम्मल निज़ाम अल्लाह की क़ुदरत के हाथ में है।
सूरज और चाँद मुअय्यन मदार पर चल रहे हैं और ज़मीन अपने मरकज़ पर क़ायम है।
अल्लाह तआला अज़ाब देने पर पूरी ताक़त रखने के बावजूद अपनी रहमत से बख़्शने वाला और मोहलत देने वाला है।
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