कुरान - 39:5 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۖ يُكَوِّرُ ٱلَّيۡلَ عَلَى ٱلنَّهَارِ وَيُكَوِّرُ ٱلنَّهَارَ عَلَى ٱلَّيۡلِۖ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ كُلّٞ يَجۡرِي لِأَجَلٖ مُّسَمًّىۗ أَلَا هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡغَفَّـٰرُ

Transliteration: (Khalaqas samaawaati wal arda bilhaqq; yukawwirul laila 'alan nahaari wa yukawwirun nahaara 'alaal laili wa sakhkharash shamsa walqamara kulluny yajree li ajalim musammaa; alaa Huwal 'Azeezul Ghaffaar)

उसने आसमानों और ज़मीन को हक़ के साथ पैदा फ़रमाया [13]; वह रात को दिन पर लपेटता है और दिन को रात पर लपेटता है [14]; और उसने सूरज और चाँद को ताबेदार बना रखा है; हर एक मुक़र्ररा वक़्त तक चल रहा है [15]; सुन लो! वही इज़्ज़त वाला, बड़ा बख़्शने वाला है [16]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 5

"उसने आसमानों और ज़मीन को हक़ के साथ पैदा फ़रमाया [13]; वह रात को दिन पर लपेटता है और दिन को रात पर लपेटता है [14]; और उसने सूरज और चाँद को ताबेदार बना रखा है; हर एक मुक़र्ररा वक़्त तक चल रहा है [15]; सुन लो! वही इज़्ज़त वाला, बड़ा बख़्शने वाला है [16]!"

[13] बे-मदद अज़ीम तख़्लीक़

अल्लाह ने पूरी कायनात को हिकमत और हक़ के साथ तन्हा पैदा फ़रमाया, उसे किसी शरीक या मददगार की कोई हाजत नहीं।

[14] रात और दिन का लपेटना (तकवीर)

गर्मियों में रात का हिस्सा दिन में शामिल होकर दिन बड़ा हो जाता है, और सर्दियों में दिन का हिस्सा रात में शामिल होकर रात बड़ी हो जाती है। यह मुकम्मल निज़ाम अल्लाह की क़ुदरत के हाथ में है।

[15] शम्स व क़मर की गर्दिश

सूरज और चाँद मुअय्यन मदार पर चल रहे हैं और ज़मीन अपने मरकज़ पर क़ायम है।

[16] अज़ीज़ व ग़फ़्फ़ार

अल्लाह तआला अज़ाब देने पर पूरी ताक़त रखने के बावजूद अपनी रहमत से बख़्शने वाला और मोहलत देने वाला है।

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