कुरान - 39:75 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
وَتَرَى ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةَ حَآفِّينَ مِنۡ حَوۡلِ ٱلۡعَرۡشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمۡدِ رَبِّهِمۡۚ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡحَقِّۚ وَقِيلَ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa taral malaaa'ikata haaaffeena min hawlil 'Arshi yusabbihoona bihamdi Rabbihim wa qudiya bainahum bilhaqqi wa qeelal hamdu lillaahi Rabbil 'aalameen (section 8))

और आप फ़रिश्तों को देखेंगे [188] कि वे अर्श के गिर्द घेरा बांधे हुए अपने रब की हम्द के साथ तस्बीह कर रहे होंगे, और लोगों के दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमा दिया जाएगा, और कहा जाएगा [189]: 'सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है जो सारे जहानों का पालने वाला है [190] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 75

"और आप फ़रिश्तों को देखेंगे [188] कि वे अर्श के गिर्द घेरा बांधे हुए अपने रब की हम्द के साथ तस्बीह कर रहे होंगे, और लोगों के दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमा दिया जाएगा, और कहा जाएगा [189]: 'सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है जो सारे जहानों का पालने वाला है [190] ।'"

[188] अर्श-ए-इलाही का तवाफ़ करते हुए मलाइका

ऐ हबीब ﷺ! क़ियामत के दिन आप देखेंगे कि बेशुमार मुक़र्रब फ़रिश्ते अर्श-ए-इलाही के गिर्द घेरा बनाए हुए अल्लाह की पाकी और हम्द के नग़्मे गा रहे होंगे, जैसे हाजी काबा का तवाफ़ करते हैं।

[189] मख़लूक़ के दरमियान इंसाफ़ का मुकम्मल फ़ैसला

इंसानों और जिन्नों के तमाम मुक़द्दमात का आख़िरी और कामिल इंसाफ़ के साथ फ़ैसला हो जाएगा। हक़ वालों को जन्नत और बातिल वालों को दोज़ख़ में भेज दिया जाएगा।

[190] 'अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन'—सदा-ए-शुक्र

फ़ैसले के इख़्तिताम पर तमाम जन्नत में, फ़रिश्तों और मोमिनीन की ज़बानों से अल्लाह की हम्द व सना की सदाएं गूंजेंगी: 'अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन'। इस तरह सूरह अज़-ज़ुमर का इख़्तिताम तौहीद, अदल और हम्द-ए-इलाही के अज़ीम मंज़र पर होता है।

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