कुरान - 39:74 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
وَقَالُواْ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي صَدَقَنَا وَعۡدَهُۥ وَأَوۡرَثَنَا ٱلۡأَرۡضَ نَتَبَوَّأُ مِنَ ٱلۡجَنَّةِ حَيۡثُ نَشَآءُۖ فَنِعۡمَ أَجۡرُ ٱلۡعَٰمِلِينَ

Transliteration: (Wa qaalull hamdulillaahil lazee sadaqanaa wa'dahoo wa awrasanal arda natabaw wa-u minal jannati haisu nashaaa'u fani'ma ajrul 'aamileen)

और वे कहेंगे: 'सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है जिसने हमसे अपना वा'दा सच्चा कर दिखाया और हमें इस ज़मीन (जन्नत) का वारिस बनाया [186] कि हम जन्नत में जहाँ चाहें रहें [187]; तो क्या ही अच्छा अज्र है नेक अमल करने वालों का!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 74

"और वे कहेंगे: 'सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है जिसने हमसे अपना वा'दा सच्चा कर दिखाया और हमें इस ज़मीन (जन्नत) का वारिस बनाया [186] कि हम जन्नत में जहाँ चाहें रहें [187]; तो क्या ही अच्छा अज्र है नेक अमल करने वालों का!'"

[186] वा'दा-ए-इलाही की सच्चाई और जन्नत की विरासत

जन्नत में पहुँचकर अहले ईमान अल्लाह का शुक्र अदा करेंगे कि उसने अंबिया की मारफ़त जो वा'दे फ़रमाए थे वे सब आज पूरे कर दिए। 'ज़मीन का वारिस' से मुराद जन्नत की ज़मीन है।

[187] जन्नत की ला-महदूद आज़ादी व वुसअत

जन्नत में हर मोमिन को इतना वसीअ मुल्क और सल्तनत अता होगी कि वह जहाँ चाहे सैर करे और रहे। एक अदना जन्नती का मक़ाम भी इस सारी दुनिया से दस गुना बड़ा होगा। नेकोकारों के लिए यह बेहतरीन सिला है।

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