कुरान - 39:72 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

72
قِيلَ ٱدۡخُلُوٓاْ أَبۡوَٰبَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ فَبِئۡسَ مَثۡوَى ٱلۡمُتَكَبِّرِينَ

Transliteration: (Qeelad khuloo abwaaba jahannama khaalideena feeha fabi'sa maswal mutakabbireen)

कहा जाएगा: 'जहन्नम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ, हमेशा इसमें रहने के लिए [180]; तो क्या ही बुरा ठिकाना है तकब्बुर करने वालों का!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 72 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 72

"कहा जाएगा: 'जहन्नम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ, हमेशा इसमें रहने के लिए [180]; तो क्या ही बुरा ठिकाना है तकब्बुर करने वालों का!'"

[180] हमेशा का दाख़िला और तकब्बुर का अंजाम

काफ़िरों को हुक्म होगा कि जहन्नम में दाख़िल हो जाओ जहाँ से कभी निकलना नसीब न होगा। दुनिया में जो लोग हक़ के मुक़ाबले में घमंड और तकब्बुर दिखाते थे, उनका आख़िरी अंजाम यही बदतरीन और रुसवाकुन आग है।

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