Transliteration: (Wa seeqal lazeenat taqaw Rabbahum ilal Jannati zumaraa hattaaa izaa jaaa'oohaa wa futihat abwaabuhaa wa qaala lahum khazanatuhaa salaamun 'alaikum tibtum fadkhuloohaa khaalideen)
"और जो लोग अपने रब से डरते रहे उनकी सवारियों को गिरोह-दर-गिरोह जनà¥à¤¨à¤¤ की तरफ़ (बा-इज़à¥à¤œà¤¼à¤¤) ले जाया जाà¤à¤—ा [181] [182]; यहाठतक कि जब वे वहाठपहà¥à¤à¤šà¥‡à¤‚गे और उसके दरवाज़े पहले से खà¥à¤²à¥‡ होंगे [183], और उसके दरबान उनसे कहेंगे: 'सलाम हो तà¥à¤® पर [184]! तà¥à¤® बहà¥à¤¤ पाकीज़ा रहे, सो इसमें हमेशा रहने के लिठदाख़िल हो जाओ [185] ।'"
जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में तक़à¥à¤µà¤¾ और परहेज़गारी की ज़िंदगी गà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤°à¥€, अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के अहकाम पर चले और गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ से बचे, उनका महशर में बेमिसाल à¤à¤œà¤¼à¤¾à¤œà¤¼ व इकà¥à¤°à¤¾à¤® होगा।
मोमिनीन को पैदल नहीं बलà¥à¤•ि नूरानी सवारियों पर बा-इज़à¥à¤œà¤¼à¤¤ जनà¥à¤¨à¤¤ की तरफ़ ले जाया जाà¤à¤—ा। अंबिया, सिदà¥à¤¦à¥€à¤•़ीन, शोहदा और सालेहीन अपने-अपने मरà¥à¤¤à¤¬à¥‹à¤‚ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ पà¥à¤°-वक़ार गिरोहों में तशरीफ़ ले जाà¤à¤‚गे।
जहनà¥à¤¨à¤® के दरवाज़े काफ़िरों के आने के बाद खोले जाà¤à¤‚गे, मगर जनà¥à¤¨à¤¤ के दरवाज़े अहले ईमान के पहà¥à¤à¤šà¤¨à¥‡ से पहले ही उनके इसà¥à¤¤à¤•़बाल के लिठखोल दिठजाà¤à¤‚गे ताकि मेहमानों को इंतज़ार की ज़हमत न हो।
जनà¥à¤¨à¤¤ के दारोग़ा (हज़रत रिज़वान अलैहिसà¥à¤¸à¤²à¤¾à¤® और मलाइका) निहायत ताज़ीम से सलाम पेश करेंगे और कहेंगे: 'सलामती हो तà¥à¤® पर, मà¥à¤¬à¤¾à¤°à¤• हो तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚!'
कहा जाà¤à¤—ा कि तà¥à¤® शिरà¥à¤• और गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ की गंदगियों से पाक रहे, अब इस नेमतों à¤à¤°à¥€ जनà¥à¤¨à¤¤ में दाख़िल हो जाओ जहाठन कà¤à¥€ मौत आà¤à¤—ी, न बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¤¾, और न कोई नेमत ज़वाल पज़ीर होगी।
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