कुरान - 39:70 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
وَوُفِّيَتۡ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا عَمِلَتۡ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِمَا يَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Wa wuffiyat kullu nafsim maa 'amilat wa Huwa a'lamu bimaa yaf'aloon (section 7))

और हर जान को उसके किए का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा [170], और वह ख़ूब जानता है जो कुछ वे करते हैं [171] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 70

"और हर जान को उसके किए का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा [170], और वह ख़ूब जानता है जो कुछ वे करते हैं [171] ।"

[170] पूरा-पूरा बदला और फ़ज़्ल-ए-इलाही

हर इंसान को उसके आमाल का मुकम्मल जज़ा या सज़ा दी जाएगी। नेकी का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना और उससे भी ज़्यादा अता होगा, जबकि गुनाह की सज़ा उसके बराबर ही होगी।

[171] इल्म-ए-इलाही का मुकम्मल एहाता

अल्लाह तआला अपने बंदों के हर ज़ाहिरी और बातिनी अमल, नीयत और ख़्यालात से मुकम्मल तौर पर बाख़बर है। उसे गवाहों या दफ़्तरों की हाजत नहीं, बल्कि यह सब बंदों पर हुज्जत पूरी करने के लिए है।

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