कुरान - 39:71 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
وَسِيقَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُوهَا فُتِحَتۡ أَبۡوَٰبُهَا وَقَالَ لَهُمۡ خَزَنَتُهَآ أَلَمۡ يَأۡتِكُمۡ رُسُلٞ مِّنكُمۡ يَتۡلُونَ عَلَيۡكُمۡ ءَايَٰتِ رَبِّكُمۡ وَيُنذِرُونَكُمۡ لِقَآءَ يَوۡمِكُمۡ هَٰذَاۚ قَالُواْ بَلَىٰ وَلَٰكِنۡ حَقَّتۡ كَلِمَةُ ٱلۡعَذَابِ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa seeqal lazeena kafaroo ilaa jahannama zumaraa hattaaa izaa jaaa'oohaa futihat abwaabuhaa wa qaala lahum khazanatuhaaa alam ya'tikum Rusulun minkum yatloona 'alaikum Aayaati Rabbikum wa yunziroonakum liqaaa'a Yawmikum haazaa; qaaloo balaa wa laakin haqqat kalimatul 'azaabi 'alal kaafireen)

और काफ़िरों को गिरोह-दर-गिरोह जहन्नम की तरफ़ हाँका जाएगा [172] [173]; यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेंगे तो उसके दरवाज़े खोल दिए जाएंगे [174], और उसके दारोग़ा उनसे कहेंगे [175]: 'क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे [176] जो तुम पर तुम्हारे रब की आयतें पढ़ते थे और तुम्हें तुम्हारे इस दिन की मुलाक़ात से डराते थे [177]?' वे कहेंगे: 'हाँ क्यों नहीं [178]!' मगर अज़ाब का क़ौल काफ़िरों पर साबित हो चुका था [179] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 71

"और काफ़िरों को गिरोह-दर-गिरोह जहन्नम की तरफ़ हाँका जाएगा [172] [173]; यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेंगे तो उसके दरवाज़े खोल दिए जाएंगे [174], और उसके दारोग़ा उनसे कहेंगे [175]: 'क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे [176] जो तुम पर तुम्हारे रब की आयतें पढ़ते थे और तुम्हें तुम्हारे इस दिन की मुलाक़ात से डराते थे [177]?' वे कहेंगे: 'हाँ क्यों नहीं [178]!' मगर अज़ाब का क़ौल काफ़िरों पर साबित हो चुका था [179] ।"

[172] ज़िल्लत के साथ जहन्नम की तरफ़ हाँकना

काफ़िरों को मुजरिमों की तरह ज़लील व ख़्वार करके, ज़ंजीरों और तौक़ों में जकड़कर दोज़ख़ की तरफ़ धकेला जाएगा।

[173] गिरोह-दर-गिरोह क़िस्म-वार तक़सीम

जैसे दुनिया में उनके मुख़्तलिफ़ बातिल फिरक़े और गिरोह थे, वैसे ही उन्हें अलग-अलग गिरोहों में जहन्नम के अलग-अलग दर्जात की तरफ़ ले जाया जाएगा।

[174] जहन्नम के दरवाज़ों का उनके पहुँचने पर खुलना

जहन्नम के सात दरवाज़े हैं जो पहले से बंद होंगे। जब काफ़िर वहाँ पहुँचेंगे तो अचानक उनके सामने दरवाज़े खोले जाएंगे ताकि उनकी हैबत और ख़ौफ़ में बेपनाह इज़ाफ़ा हो।

[175] दारोग़ा-ए-जहन्नम की मलामत

जहन्नम के निगहबान फ़रिश्ते (हज़रत मालिक अलैहिस्सलाम और ज़बानिया) उन्हें दाख़िल करने से पहले सख़्त डांट-डपट और मलामत करेंगे।

[176] इंसानों में से रसूलों की आमद

अल्लाह ने हर दौर में इंसानों ही की जिन्स से रसूल भेजे ताकि वे उनकी बात समझ सकें और हिदायत पा सकें।

[177] क़ियामत के दिन की वईदें

रसूलों ने अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाईं और इस ख़ौफ़नाक दिन के अज़ाब से डराया था।

[178] जुर्म का एतिराफ़

काफ़िर बेबस होकर इक़रार करेंगे कि बेशक रसूल आए थे और उन्होंने समझाया था, मगर हमने ही उनकी न मानी।

[179] अज़ाब के फ़ैसले का वाजिब होना

अल्लाह का यह फ़ैसला कि 'मैं जहन्नम को शैतान और उसके पैरोकारों से भर दूंगा' हक़ साबित हो चुका था, इसलिए अब उन्हें सज़ा भुगतनी ही होगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now