कुरान - 39:6 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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خَلَقَكُم مِّن نَّفۡسٖ وَٰحِدَةٖ ثُمَّ جَعَلَ مِنۡهَا زَوۡجَهَا وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلۡأَنۡعَٰمِ ثَمَٰنِيَةَ أَزۡوَٰجٖۚ يَخۡلُقُكُمۡ فِي بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمۡ خَلۡقٗا مِّنۢ بَعۡدِ خَلۡقٖ فِي ظُلُمَٰتٖ ثَلَٰثٖۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡ لَهُ ٱلۡمُلۡكُۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ فَأَنَّىٰ تُصۡرَفُونَ

Transliteration: (Khalaqakum min nafsinw waahidatin summa ja'ala minhaa zawjahaa wa anzala lakum minal-an'aami samaani yata azwaaj; yakhlu qukum fee butooni ummahaatikum khalqam mim ba'di khalqin fee zulumaatin salaas; zaalikumul laahu Rabbukum lahul mulk; laaa ilaaha illaa Huwa fa annaa tusrafoon)

उसने तुम्हें एक जान से पैदा किया [17], फिर उससे उसका जोड़ा बनाया [18], और तुम्हारे लिए चौपाए मवेशियों में से आठ जोड़े उतारे [19]; वह तुम्हें तुम्हारी माँओं के पेट में एक पैदाइश के बाद दूसरी पैदाइश के मराहिल में बनाता है [20], तीन अंधेरी परतों के अंदर [21]! यही अल्लाह तुम्हारा रब है, उसी की बादशाही है [22], कोई माबूद नहीं सिवाए उसके [23]; फिर तुम कहाँ फिरे जाते हो? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 6

"उसने तुम्हें एक जान से पैदा किया [17], फिर उससे उसका जोड़ा बनाया [18], और तुम्हारे लिए चौपाए मवेशियों में से आठ जोड़े उतारे [19]; वह तुम्हें तुम्हारी माँओं के पेट में एक पैदाइश के बाद दूसरी पैदाइश के मराहिल में बनाता है [20], तीन अंधेरी परतों के अंदर [21]! यही अल्लाह तुम्हारा रब है, उसी की बादशाही है [22], कोई माबूद नहीं सिवाए उसके [23]; फिर तुम कहाँ फिरे जाते हो?"

[17] एक जान (हज़रत आदम) से तख़्लीक़

ज़ाहिरी तौर पर तमाम इंसान हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से पैदा हुए, और रूहानी तौर पर पूरी कायनात का अस्ल हुज़ूर सय्यिदे आलम ﷺ का नूरे मुबारक़ है।

[18] हज़रत हव्वा की पैदाइश

हज़रत आदम से उनकी ज़ौजा हज़रत हव्वा को पैदा फ़रमाया गया।

[19] आठ चौपाए मवेशी

ऊँट, गाय, भेड़ और बकरी के चार नर और चार मादा मिलाकर आठ जोड़े इंसानी मआश और नफ़ा के लिए अता फ़रमाए।

[20] रहमे मादर में तख़्लीक़ के मराहिल

नुत्फ़ा, अलक़ा (जमा हुआ ख़ून), मुज़ग़ा (गोश्त की बोटी) और फिर मुकम्मल इंसानी सूरत—यह सब अल्लाह की हिकमत का कमाल है।

[21] तीन तरीकियाँ (ज़ुलुमात)

माँ का पेट, रहम (बच्चेदानी) और वह झिल्ली जिसमें बच्चा लिपटा होता है—इन तीन तारीकियों में बिना खिड़की या सुराख़ के बच्चे को ग़िज़ा और साँस पहुँचाना कुदरते इलाही का अज़ीम मोजिज़ा है।

[22] मुतलक़ुल इनान बादशाही

पूरी कायनात का हक़ीक़ी बादशाह और हाकिम सिर्फ़ वही अल्लाह है।

[23] इबादत सिर्फ़ अल्लाह का हक़

जब ख़ालिक़ और मालिक वही है, तो इबादत भी सिर्फ़ उसी का हक़ है; बुतों की तरफ़ जाना सरासर गुमराही है।

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