कुरान - 39:4 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
لَّوۡ أَرَادَ ٱللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدٗا لَّٱصۡطَفَىٰ مِمَّا يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ سُبۡحَٰنَهُۥۖ هُوَ ٱللَّهُ ٱلۡوَٰحِدُ ٱلۡقَهَّارُ

Transliteration: (Law araadal laahu aiyattakhiza waladal lastafaa mimmaa yakhluqu maa yashaaa'; Subhaanahoo Huwal laahul Waahidul Qahhaar)

अगर अल्लाह अपने लिए औलाद बनाना चाहता, तो अपनी मख़्लूक़ में से जिसे चाहता चुन लेता [11]; वह पाक है! वही अल्लाह है जो अकेला, सब पर ग़ालिब (क़ह्हारी) है [12]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 4

"अगर अल्लाह अपने लिए औलाद बनाना चाहता, तो अपनी मख़्लूक़ में से जिसे चाहता चुन लेता [11]; वह पाक है! वही अल्लाह है जो अकेला, सब पर ग़ालिब (क़ह्हारी) है [12]!"

[11] मुहाले अक़्ली पर फ़र्ज़

यह बात मुशरिकीन की मंतिक़ के रद्द के तौर पर ब-तौर फ़र्ज़ कही गई कि अगर (नौजुबिल्लाह) अल्लाह को औलाद की हाजत होती, तो वह अपनी मर्ज़ी से चुनता, काफ़िरों की तराशी हुई औलाद का पाबंद न होता।

[12] औलाद के तसव्वुर से कामिल तंज़ीह

अल्लाह तआला औलाद, बीवी और तमाम ऐबों से पाक है। वह "अल-क़ह्र" है, सब पर ग़ालिब और मुतलक़ुल इनान है। औलाद की हाजत उसे होती है जो कमज़ोर हो, फ़ना होने वाला हो या वारिस का मोहताज हो; अल्लाह हय्यु व क़य्यूम और बे-नियाज़ है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now