कुरान - 39:37 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَمَن يَهۡدِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن مُّضِلٍّۗ أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِعَزِيزٖ ذِي ٱنتِقَامٖ

Transliteration: (Wa mai yahdil laahu famaa lahoo min mudil; alai sal laahu bi'azeezin zin tiqaam)

और जिसे अल्लाह हिदायत दे उसे कोई भटकाने वाला नहीं [92], क्या अल्लाह ज़बरदस्त, बदला लेने वाला नहीं है? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 37

"और जिसे अल्लाह हिदायत दे उसे कोई भटकाने वाला नहीं [92], क्या अल्लाह ज़बरदस्त, बदला लेने वाला नहीं है?"

[92] नूर-ए-हिदायत की अटूट हिफ़ाज़त

जिस ख़ुशनसीब के सीने को अल्लाह तआला नूर-ए-ईमान से मुनव्वर फ़रमा दे और हिदायत की तौफ़ीक़ बख़्श दे, उसे शैतान, नफ़्स या कोई बातिल फ़लसफ़ा कभी गुमराह नहीं कर सकता। वह हमेशा हक़ पर क़ायम रहता है।

अल्लाह तआला 'अज़ीज़' (निहायत ज़बरदस्त और ग़ालिब) है, जिसके अहकाम को कोई टाल नहीं सकता, और 'ज़ुनतिक़ाम' (सच्चा बदला लेने वाला) है, जो अपने दीनों-रसूल के दुश्मनों और सरकशों को उनके किए की पूरी सज़ा देगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now