कुरान - 39:39 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
قُلۡ يَٰقَوۡمِ ٱعۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمۡ إِنِّي عَٰمِلٞۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qul yaa qawmi'maloo 'alaa makaanatikum innee 'aamilun fasawfa ta'lamoon)

आप फ़रमाइए: 'ऐ मेरी क़ौम [96]! तुम अपनी जगह पर अमल करते रहो, मैं अपना काम करता हूँ, जल्द ही तुम्हें मालूम हो जाएगा [97] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 39

"आप फ़रमाइए: 'ऐ मेरी क़ौम [96]! तुम अपनी जगह पर अमल करते रहो, मैं अपना काम करता हूँ, जल्द ही तुम्हें मालूम हो जाएगा [97] ।'"

[96] 'ऐ मेरी क़ौम'—दावत का शफ़क़त भरा अंदाज़

काफ़िरों को 'ऐ मेरी क़ौम' कहना क़ौमी व नसली निसबत के ऐतबार से है, न कि दीनी ऐतबार से। इसमें तब्लीग़ और दावत-ए-हक़ का यह अदब सिखाया गया कि मुख़ालििफ़ीन को भी नरमी और हुस्न-ए-ख़िताब से मुख़ातब किया जाए।

'तुम अपनी जगह अमल करो' यह इजाज़त नहीं बल्कि सख़्त धमकी और बेज़ारी का इज़हार है, यानी तुम अपनी हठधर्मी पर अड़े रहो, मैं अपने रब का पैग़ाम पहुँचाता रहूँगा।

[97] अनक़रीब अंजाम सामने आ जाएगा

जल्द ही दुनिया में (बद्र और फ़तह-ए-मक्का के दिन) और आख़िरत में मौत के वक़्त तुम्हें मालूम हो जाएगा कि हक़ पर कौन था और रुसवाई किसका मुक़द्दर बनी।

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