Transliteration: (Mai yaateehi 'azaabuny yukhzeehi wa yahillu 'alaihi 'azaabum muqeem)
"कि किस पर वह अज़ाब आता है जो उसे रà¥à¤¸à¤µà¤¾ कर दे [98], और किस पर वह अज़ाब उतरता है [99] जो हमेशा रहने वाला है [100] ।"
इससे मà¥à¤°à¤¾à¤¦ वह ज़िलà¥à¤²à¤¤-आमेज़ अज़ाब है जो दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में क़तà¥à¤² व क़ैद और आख़िरत में ज़लील व ख़à¥à¤µà¤¾à¤° करके दिया जाà¤à¤—ा। काफ़िरों को à¤à¤¸à¥€ रà¥à¤¸à¤µà¤¾à¤ˆ का सामना होगा कि वे अपनी सूरतें छà¥à¤ªà¤¾à¤¤à¥‡ फिरेंगे।
यह अज़ाब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ क़हार व जबà¥à¤¬à¤¾à¤° की तरफ़ से होगा, जिससे à¤à¤¾à¤—ने या बचने की कोई राह न होगी।
यह दायमी अज़ाब सिरà¥à¤«à¤¼ और सिरà¥à¤«à¤¼ काफ़िरों और मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•ों के लिठमख़सूस है जो जहनà¥à¤¨à¤® में हमेशा-हमेशा रहेंगे और कà¤à¥€ इससे रिहाई न पाà¤à¤‚गे।
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