कुरान - 39:40 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
مَن يَأۡتِيهِ عَذَابٞ يُخۡزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيۡهِ عَذَابٞ مُّقِيمٌ

Transliteration: (Mai yaateehi 'azaabuny yukhzeehi wa yahillu 'alaihi 'azaabum muqeem)

कि किस पर वह अज़ाब आता है जो उसे रुसवा कर दे [98], और किस पर वह अज़ाब उतरता है [99] जो हमेशा रहने वाला है [100] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 40

"कि किस पर वह अज़ाब आता है जो उसे रुसवा कर दे [98], और किस पर वह अज़ाब उतरता है [99] जो हमेशा रहने वाला है [100] ।"

[98] रुसवाकुन अज़ाब

इससे मुराद वह ज़िल्लत-आमेज़ अज़ाब है जो दुनिया में क़त्ल व क़ैद और आख़िरत में ज़लील व ख़्वार करके दिया जाएगा। काफ़िरों को ऐसी रुसवाई का सामना होगा कि वे अपनी सूरतें छुपाते फिरेंगे।

[99] अल्लाह का नाज़िल करदा अज़ाब

यह अज़ाब अल्लाह क़हार व जब्बार की तरफ़ से होगा, जिससे भागने या बचने की कोई राह न होगी।

[100] हमेशा रहने वाला अज़ाब-ए-जहन्नम

यह दायमी अज़ाब सिर्फ़ और सिर्फ़ काफ़िरों और मुशरिकों के लिए मख़सूस है जो जहन्नम में हमेशा-हमेशा रहेंगे और कभी इससे रिहाई न पाएंगे।

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