Transliteration: (Allaahu yatawaffal anfusa heena mawtihaa wallatee lam tamut fee manaamihaa fa yumsikul latee qadaa 'alaihal mawta wa yursilul ukhraaa ilaaa ajalim musammaa; inna fee zaalika la Aayaatil liqawmai yatafakkarroon)
"अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ रूहों को उनकी मौत के वक़à¥à¤¤ क़बà¥à¤œà¤¼ फ़रमा लेता है [105], और जिनकी मौत नहीं आई उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उनकी नींद की हालत में [106]; फिर जिन पर मौत का हà¥à¤•à¥à¤® फ़रमा चà¥à¤•ा है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रोक लेता है [107], और दूसरों को à¤à¤• मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¤ तक के लिठवापस à¤à¥‡à¤œ देता है [108]; बेशक इसमें ग़ौर करने वालों के लिठबड़ी निशानियां हैं [109] ।"
जब किसी इंसान की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ ज़िंदगी की मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¤ पूरी हो जाती है, तो अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला मलकà¥à¤² मौत हज़रत इज़राईल अलैहिसà¥à¤¸à¤²à¤¾à¤® के ज़रिये उसकी रूह को जिसà¥à¤® से पूरी तरह जà¥à¤¦à¤¾ फ़रमा लेता है।
इंसान में दो क़िसà¥à¤® की रूहानी कà¥à¤µà¥à¤µà¤¤à¥‡à¤‚ मानी गई हैं—à¤à¤• रूह-à¤-हयात (जिससे ज़िंदगी क़ायम रहती है) और दूसरी रूह-à¤-तमीज़ (जिससे शऊर व à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ रहता है)। नींद की हालत में रूह-à¤-तमीज़ का तालà¥à¤²à¥à¤•़ जिसà¥à¤® से ढीला हो जाता है और वह आलम-à¤-बाला की सैर करती है, इसी लिठनींद को 'मौत की बहन' कहा गया है।
जिनकी मौत का वक़à¥à¤¤ आ पहà¥à¤à¤šà¤¾ होता है, उनकी रूह को नींद की हालत ही में रोक लिया जाता है और वे दोबारा बेदार नहीं होते बलà¥à¤•ि सोते ही सोते दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से कूच कर जाते हैं।
जिनकी ज़िंदगी बाक़ी होती है, उनकी रूह को बेदारी के वक़à¥à¤¤ वापस लौटा दिया जाता है ताकि वे अपनी मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤°à¤¾ उमà¥à¤° पूरी करें। यह रोज़ाना का सोना और जागना अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की क़à¥à¤¦à¤°à¤¤ का अज़ीम मà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤¹à¤°à¤¾ है।
जो ज़ात रोज़ाना तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ नींद के बाद दोबारा ज़िंदा (बेदार) करती है, वही ज़ात क़ियामत के दिन मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर-à¤-मà¥à¤¤à¤²à¤•़ है।
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