कुरान - 39:44 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
قُل لِّلَّهِ ٱلشَّفَٰعَةُ جَمِيعٗاۖ لَّهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ ثُمَّ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Qul lillaahish shafaa'atu jamee'aa; lahoo mulkus samaawaati wal ardi summa ilaihi turja'oon)

आप फ़रमाइए: 'सारी शफ़ाअत अल्लाह ही के इख़्तियार में है [112], उसी के लिए आसमानों और ज़मीन की बादशाही है, फिर तुम उसी की तरफ़ लौटाए जाओगे [113] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 44

"आप फ़रमाइए: 'सारी शफ़ाअत अल्लाह ही के इख़्तियार में है [112], उसी के लिए आसमानों और ज़मीन की बादशाही है, फिर तुम उसी की तरफ़ लौटाए जाओगे [113] ।'"

[112] शफ़ाअत का असली मालिक अल्लाह तआला है

शफ़ाअत का कुल्ली मालिक अल्लाह तआला है। उसकी बारगाह में कोई अपनी मर्ज़ी या ज़ोर से शफ़ाअत नहीं कर सकता जब तक कि वह खुद इजाज़त न अता फ़रमाए। और वह अपने महबूब बंदों को यह इज़्न अता फ़रमाएगा ताकि महशर में उनकी शान और इज़्ज़त ज़ाहिर हो।

[113] रुजूअ-ए-इलाही और हिसाब

आसमान व ज़मीन की मुतलक़ हुकूमत उसी की है और आख़िरकार सबको उसी की बारगाह में पेश होना है। मोमिनीन अपने महबूब रब की बारगाह में ख़ुशी-ख़ुशी हाज़िर होंगे जबकि काफ़िर ज़बरदस्ती घसीट कर लाए जाएंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now