Transliteration: (Qulil laahumma faatiras samaawaati wal ardi 'Aalimal Ghaibi washshahaadati Anta tahkumu baina 'ibaadika fee maa kaanoo feehee yakhtalifoon)
"आप अरà¥à¤œà¤¼ कीजिठ[116]: 'ठअलà¥à¤²à¤¾à¤¹! आसमानों और ज़मीन के पैदा फ़रमाने वाले, छà¥à¤ªà¥‡ और ज़ाहिर के जानने वाले! तू ही अपने बंदों के दरमियान उन बातों का फ़ैसला फ़रमाà¤à¤—ा जिनमें वे इख़à¥à¤¤à¤¿à¤²à¤¾à¤«à¤¼ करते थे [117] ।'"
हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® को यह दà¥à¤† तालीम फ़रमाई गई। जब बंदा अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला की हमà¥à¤¦ व सना, उसकी ख़ालिक़ियत और इलà¥à¤®-à¤-ग़ैब व शहादत की कामिल सिफ़ात के साथ दà¥à¤† मांगता है, तो वह बारगाह-à¤-इलाही में यक़ीनन मक़बूल होती है।
हज़रत सईद इबà¥à¤¨à¥à¤² मà¥à¤¸à¤¯à¥à¤¯à¤¬ रज़ियलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अनà¥à¤¹à¥ फ़रमाते हैं कि जो शख़à¥à¤¸ किसी मà¥à¤¶à¥à¤•िल के वक़à¥à¤¤ इस आयत के ज़रिये दà¥à¤† मांगे, अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला उसकी दà¥à¤† ज़रूर क़बूल फ़रमाता है। बंदों के तमाम इख़à¥à¤¤à¤¿à¤²à¤¾à¤«à¤¼à¤¾à¤¤ का आख़िरी और सचà¥à¤šà¤¾ फ़ैसला अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ही फ़रमाà¤à¤—ा।
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