Transliteration: (Wa izaa zukiral laahu wahdahush ma azzat quloobul lazeena laa yu'minoona bil Aakhirati wa izaa zukiral lazeena min dooniheee izaa hum yastabshiroon)
"और जब सिरà¥à¤«à¤¼ अकेले अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का ज़िकà¥à¤° किया जाता है, तो उन लोगों के दिल नफ़रत से à¤à¤° जाते हैं जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते [114], और जब उसके सिवा दूसरों (उनके à¤à¥‚ठे माबूदों) का ज़िकà¥à¤° होता है [115], तो वे फ़ौरन ख़à¥à¤¶ हो जाते हैं।"
जब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला की वहदानियत और तौहीद-à¤-ख़ालिस का ज़िकà¥à¤° होता है, तो मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•ों और आख़िरत के मà¥à¤¨à¤•िरों के चेहरे बिगड़ जाते हैं और उनके दिलों में तंगी व बà¥à¤—़à¥à¤œà¤¼ पैदा होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह उनके बातिल अक़ाइद के ख़िलाफ़ है।
'उसके सिवा' से मà¥à¤°à¤¾à¤¦ मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•ों के बà¥à¤¤ और à¤à¥‚ठे माबूद हैं। जब उनके बà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का नाम लिया जाता तो वे बाग़-बाग़ हो जाते थे। यह उनके दिल के कà¥à¤«à¤¼à¥à¤° और निफ़ाक़ की अलामत थी।
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