कुरान - 39:45 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَإِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَحۡدَهُ ٱشۡمَأَزَّتۡ قُلُوبُ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِۖ وَإِذَا ذُكِرَ ٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦٓ إِذَا هُمۡ يَسۡتَبۡشِرُونَ

Transliteration: (Wa izaa zukiral laahu wahdahush ma azzat quloobul lazeena laa yu'minoona bil Aakhirati wa izaa zukiral lazeena min dooniheee izaa hum yastabshiroon)

और जब सिर्फ़ अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है, तो उन लोगों के दिल नफ़रत से भर जाते हैं जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते [114], और जब उसके सिवा दूसरों (उनके झूठे माबूदों) का ज़िक्र होता है [115], तो वे फ़ौरन ख़ुश हो जाते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 45

"और जब सिर्फ़ अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है, तो उन लोगों के दिल नफ़रत से भर जाते हैं जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते [114], और जब उसके सिवा दूसरों (उनके झूठे माबूदों) का ज़िक्र होता है [115], तो वे फ़ौरन ख़ुश हो जाते हैं।"

[114] तौहीद के ज़िक्र से मुनकिरों की नफ़रत

जब अल्लाह तआला की वहदानियत और तौहीद-ए-ख़ालिस का ज़िक्र होता है, तो मुशरिकों और आख़िरत के मुनकिरों के चेहरे बिगड़ जाते हैं और उनके दिलों में तंगी व बुग़्ज़ पैदा होता है क्योंकि यह उनके बातिल अक़ाइद के ख़िलाफ़ है।

[115] बुतों के ज़िक्र पर मुशरिकों की ख़ुशी

'उसके सिवा' से मुराद मुशरिकों के बुत और झूठे माबूद हैं। जब उनके बुतों का नाम लिया जाता तो वे बाग़-बाग़ हो जाते थे। यह उनके दिल के कुफ़्र और निफ़ाक़ की अलामत थी।

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