कुरान - 40:22 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ كَانَت تَّأۡتِيهِمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَكَفَرُواْ فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُۚ إِنَّهُۥ قَوِيّٞ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

Transliteration: (Zaalika bi annahum kaanat taateehim Rusuluhum bilbaiyinaati fakafaroo fa akhazahumul laah; innahoo qawiyyun shadeedul 'iqaab)

यह इसलिए कि उनके पास उनके रसूल रोशन दलाइल लेकर आए तो उन्होंने इनकार किया, पस अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया [57]; बेशक वह ताक़तवर, सख़्त अज़ाब देने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 22

"यह इसलिए कि उनके पास उनके रसूल रोशन दलाइल लेकर आए तो उन्होंने इनकार किया, पस अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया [57]; बेशक वह ताक़तवर, सख़्त अज़ाब देने वाला है।"

[57] रसूलों की मुख़ालफ़त ही हलाकत का सबब

क़ौमों पर अज़ाब महज़ दुनियावी ख़राबी की वजह से नहीं बल्कि रसूलों को झुठलाने और उनकी मुख़ालफ़त करने की बिना पर नाज़िल हुआ। फ़िरऔन ने 400 साल ख़ुदाई का दावा किया मगर जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की मुख़ालफ़त की तो ग़र्क़ कर दिया गया।

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