कुरान - 40:21 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
۞أَوَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ كَانُواْ مِن قَبۡلِهِمۡۚ كَانُواْ هُمۡ أَشَدَّ مِنۡهُمۡ قُوَّةٗ وَءَاثَارٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُ بِذُنُوبِهِمۡ وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاقٖ

Transliteration: (Awalam yaseeroo fil ardi fa yanzuroo kaifa kaana 'aaqibatul lazeena kaanoo min qablihim; kaanoo hum ashadda minhum quwwatanw wa aasaaran fil ardi fa akhazahumul laahu bizunoobihim wa maa kaana lahum minal laahi minw waaq)

क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की कि देखते कि उनसे पहले वालों का अंजाम कैसा हुआ [54]? वे ताक़त में और ज़मीन में छोड़ी हुई निशानियों (इमारतों) में इनसे कहीं ज़्यादा थे [55]; फिर भी अल्लाह ने उनके गुनाहों के सबब उन्हें पकड़ लिया, और उन्हें अल्लाह (के अज़ाब) से बचाने वाला कोई न था [56] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 21

"क्या उन्होंने ज़मीन में सैर नहीं की कि देखते कि उनसे पहले वालों का अंजाम कैसा हुआ [54]? वे ताक़त में और ज़मीन में छोड़ी हुई निशानियों (इमारतों) में इनसे कहीं ज़्यादा थे [55]; फिर भी अल्लाह ने उनके गुनाहों के सबब उन्हें पकड़ लिया, और उन्हें अल्लाह (के अज़ाब) से बचाने वाला कोई न था [56] ।"

[54] ज़मीन में सैर और इबरत हासिल करना

तारीख़ी मक़ामात और पिछली हलाकशुदा क़ौमों के खंडर देखकर इबरत हासिल करना मतलूब है।

[55] पिछली क़ौमों की ताक़त व आसार

आद और समूद जैसी क़ौमों ने पहाड़ों को तराश कर महल बनाए थे और जिस्मानी ऐतबार से भी क़ुरैश से बहुत ज़्यादा ताक़तवर थे।

[56] कोई बचाने वाला न रहा

जब अल्लाह का क़हर आया तो न उनकी ताक़त काम आई और न उनके मज़बूत क़िले उन्हें बचा सके।

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