कुरान - 40:19 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
يَعۡلَمُ خَآئِنَةَ ٱلۡأَعۡيُنِ وَمَا تُخۡفِي ٱلصُّدُورُ

Transliteration: (Ya'lamu khaaa'inatal a'yuni wa maa tukhfis sudoor)

वह आँखों की ख़ियानत (चोरी-छिपे की नज़र) को जानता है [49], और जो कुछ सीनों में छुपा है उसे भी जानता है [50] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 19

"वह आँखों की ख़ियानत (चोरी-छिपे की नज़र) को जानता है [49], और जो कुछ सीनों में छुपा है उसे भी जानता है [50] ।"

[49] आँखों की ख़ियानत

चोरी-छिपे किसी नामहरम या हराम चीज़ को शहवत की निगाह से देखना आँखों की ख़ियानत है। अल्लाह तआला पलकों की हरकत और आँखों के इशारों तक से बाख़बर है।

[50] सीनों के छुपे राज़

दिलों में पलने वाले इरादे, खोट, कीना, तकब्बुर और नेक ख़्यालात सब अल्लाह के इल्म-ए-मुहीत में हैं।

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