कुरान - 40:18 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَأَنذِرۡهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡأٓزِفَةِ إِذِ ٱلۡقُلُوبُ لَدَى ٱلۡحَنَاجِرِ كَٰظِمِينَۚ مَا لِلظَّـٰلِمِينَ مِنۡ حَمِيمٖ وَلَا شَفِيعٖ يُطَاعُ

Transliteration: (Wa anzirhum yawmal aazifati izil quloobu ladal hanaajiri kaazimeen; maa lizzaalimeena min hameeminw wa laa shafee'iny-yutaa')

और आप उन्हें उस क़रीब आने वाली आफ़त के दिन (क़ियामत) से डराइए जब ग़म के मारे दिल गलों तक आ रहे होंगे [47]; ज़ालिमों का न कोई दिली दोस्त होगा और न कोई ऐसा सिफ़ारिशी जिसकी बात मानी जाए [48] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 18

"और आप उन्हें उस क़रीब आने वाली आफ़त के दिन (क़ियामत) से डराइए जब ग़म के मारे दिल गलों तक आ रहे होंगे [47]; ज़ालिमों का न कोई दिली दोस्त होगा और न कोई ऐसा सिफ़ारिशी जिसकी बात मानी जाए [48] ।"

[47] दिल गलों तक आना—महशर की दहशत

क़ियामत की हौलनाकी ऐसी होगी कि ख़ौफ़ और घबराहट से लोगों के दिल अपनी जगह से हटकर गलों में अटक जाएंगे, न बाहर निकलेंगे कि मौत आ जाए और न अपनी जगह लौटेंगे।

[48] काफ़िरों के लिए कोई मददगार या शफ़ीअ नहीं

काफ़िरों और ज़ालिमों का कोई हमदर्द न होगा। शफ़ाअत सिर्फ़ मोमिनीन के लिए मख़सूस होगी जो हुज़ूर शाफ़ेअ-ए-महशर ﷺ और अल्लाह के मुक़र्रब बंदों के ज़रिये होगी।

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