कुरान - 40:16 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
يَوۡمَ هُم بَٰرِزُونَۖ لَا يَخۡفَىٰ عَلَى ٱللَّهِ مِنۡهُمۡ شَيۡءٞۚ لِّمَنِ ٱلۡمُلۡكُ ٱلۡيَوۡمَۖ لِلَّهِ ٱلۡوَٰحِدِ ٱلۡقَهَّارِ

Transliteration: (Yawma hum baarizoona laa yakhfaa 'alal laahi minhum shai; limanil mulkul Yawma lillaahil Waahidil Qahaar)

जिस दिन वे सब खुलकर सामने आ जाएंगे [41]; अल्लाह पर उनका कुछ भी छुपा न रहेगा [42]; (उस दिन फ़रमाया जाएगा:) 'आज किसकी बादशाही है? सिर्फ़ अल्लाह की, जो एक है, सब पर ग़ालिब है [43] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 16

"जिस दिन वे सब खुलकर सामने आ जाएंगे [41]; अल्लाह पर उनका कुछ भी छुपा न रहेगा [42]; (उस दिन फ़रमाया जाएगा:) 'आज किसकी बादशाही है? सिर्फ़ अल्लाह की, जो एक है, सब पर ग़ालिब है [43] ।'"

[41] महशर में बेनक़ाब हाज़िरी

उस दिन तमाम मख़लूक़ अपनी क़ब्रों से उठकर मैदान-ए-महशर में नंगे पाँव और नंगे बदन हाज़िर होगी। कोई पर्दा या दीवार छुपाने वाली न होगी।

[42] इल्म-ए-इलाही का मुकम्मल एहाता

ज़ाहिर व बातिन, नीयतें, भेद और छुपे हुए आमाल सब अल्लाह के सामने बिल्कुल बेनक़ाब होंगे।

[43] 'लिमल-मुल्क उल-यौम'—सल्तनत-ए-इलाही का जलाल

जब सूर फूँकने के बाद तमाम कायनात फ़ना हो जाएगी, तो अल्लाह तआला फ़रमाएगा: 'आज किसकी बादशाही है?' कोई जवाब देने वाला न होगा, फिर अल्लाह तआला ख़ुद ही फ़रमाएगा: 'लिल्लाहिल वाहिदिल क़हहार'—सिर्फ़ अल्लाह ही की बादशाही है जो एक है और सब पर मुतलक़ ग़ालिब है!

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