कुरान - 40:15 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
رَفِيعُ ٱلدَّرَجَٰتِ ذُو ٱلۡعَرۡشِ يُلۡقِي ٱلرُّوحَ مِنۡ أَمۡرِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ لِيُنذِرَ يَوۡمَ ٱلتَّلَاقِ

Transliteration: (Rafee'ud darajaati zul 'Arshi yulqir rooha min amrihee 'alaa mai yashaaa'u min 'ibaadihee liyunzira yawmat talaaq)

वह बुलंद दरजों वाला, अर्श का मालिक है [39]; वह अपने बंदों में से जिस पर चाहता है अपने हुक्म से वह्य (रूह-ए-ईमान) नाज़िल फ़रमाता है [40], ताकि वह (लोगों को) मुलाक़ात के दिन (क़ियामत) से डराए; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 15

"वह बुलंद दरजों वाला, अर्श का मालिक है [39]; वह अपने बंदों में से जिस पर चाहता है अपने हुक्म से वह्य (रूह-ए-ईमान) नाज़िल फ़रमाता है [40], ताकि वह (लोगों को) मुलाक़ात के दिन (क़ियामत) से डराए;"

[39] रफ़ीउद-दरजात ज़ुल-अर्श

अल्लाह तआला बुलंदियों और अज़मतों का मालिक है, और वह अपने महबूब बंदों—बिलख़ुसूस अंबिया-ए-किराम—को कायनात में सबसे आला मर्तबे अता फ़रमाता है। अर्श-ए-आज़म उसी की बादशाही का तख़्त है।

[40] वह्य-ए-इलाही और मक़सद-ए-रिसालत

'रूह' से मुराद वह्य-ए-नबुव्वत और क़ुरआन-ए-अज़ीम है जो दिलों को रूहानी ज़िंदगी बख़्शती है। अल्लाह तआला जिसे अपनी हिकमत से चुनता है उसे नबुव्वत व रिसालत से नवाज़ता है ताकि वे लोगों को क़ियामत के दिन के अज़ाब से ख़बरदार करें।

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