कुरान - 40:13 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
هُوَ ٱلَّذِي يُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ رِزۡقٗاۚ وَمَا يَتَذَكَّرُ إِلَّا مَن يُنِيبُ

Transliteration: (Huwal lazee yureekum Aayaatihee wa yunazzilu lakum minas samaaa'i rizqaa; wa maa yatazakkaru illaa mai yuneeb)

वही है जो तुम्हें अपनी निशानियां दिखाता है [35] और तुम्हारे लिए आसमान से रिज़्क़ (बारिश) नाज़िल फ़रमाता है [36], और नसीहत वही हासिल करता है जो (अल्लाह की तरफ़) रुजूअ लाता है [37] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 13

"वही है जो तुम्हें अपनी निशानियां दिखाता है [35] और तुम्हारे लिए आसमान से रिज़्क़ (बारिश) नाज़िल फ़रमाता है [36], और नसीहत वही हासिल करता है जो (अल्लाह की तरफ़) रुजूअ लाता है [37] ।"

[35] कायनात में क़ुदरत की रोशन निशानियां

ज़मीन व आसमान, चाँद-सूरज, हवाएं और मौसम सब अल्लाह की कुव्वत व वहदानियत की गवाही दे रहे हैं।

[36] आसमान से रिज़्क़ का नुज़ूल

बारिश के ज़रिये मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करना और तरह-तरह के फल, अनाज और सब्ज़ियां पैदा फ़रमाना अल्लाह ही की रहमत है।

[37] रुजूअ लाने वाले ही नसीहत पाते हैं

इन निशानियों से वही दिल फ़ायदा उठाते हैं जिनमें अल्लाह का ख़ौफ़ और सच्चाई की तलब हो, और जो हर हाल में अपने ख़ालिक़ की तरफ़ रुजूअ लाते हैं।

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