कुरान - 40:11 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
قَالُواْ رَبَّنَآ أَمَتَّنَا ٱثۡنَتَيۡنِ وَأَحۡيَيۡتَنَا ٱثۡنَتَيۡنِ فَٱعۡتَرَفۡنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلۡ إِلَىٰ خُرُوجٖ مِّن سَبِيلٖ

Transliteration: (Qaaloo Rabbanaaa amat tanasnataini wa ahyaitanas nataini fa'tarafnaa bizunoo binaa fahal ilaa khuroojim min sabeel)

वे कहेंगे: 'ऐ हमारे रब! तूने हमें दो बार मौत दी और दो बार ज़िंदा किया [30], अब हमने अपने गुनाहों का इक़रार कर लिया, तो क्या (आग से) निकलने का भी कोई रास्ता है [31]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 11

"वे कहेंगे: 'ऐ हमारे रब! तूने हमें दो बार मौत दी और दो बार ज़िंदा किया [30], अब हमने अपने गुनाहों का इक़रार कर लिया, तो क्या (आग से) निकलने का भी कोई रास्ता है [31]?'"

[30] दो मौतें और दो ज़िंदगियाँ

पहली मौत: पैदाइश से पहले का अदम (जब इंसान बेजान नुत्फ़ा था)। पहली ज़िंदगी: दुनियावी हयात। दूसरी मौत: दुनिया से रवानगी और क़ब्र। दूसरी ज़िंदगी: क़ियामत में दोबारा जी उठना। काफ़िर इस हक़ीक़त का एतिराफ़ करेंगे।

[31] आख़िरत में तौबा का बेफ़ायदा होना

दोज़ख़ में काफ़िर अपने गुनाहों का इक़रार करके छुटकारे की भीख मांगेंगे, मगर उस वक़्त यह इक़रार बिल्कुल बेसूद होगा क्योंकि वह दारुल-जज़ा है, तौबा की जगह सिर्फ़ दुनिया थी।

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