कुरान - 40:10 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يُنَادَوۡنَ لَمَقۡتُ ٱللَّهِ أَكۡبَرُ مِن مَّقۡتِكُمۡ أَنفُسَكُمۡ إِذۡ تُدۡعَوۡنَ إِلَى ٱلۡإِيمَٰنِ فَتَكۡفُرُونَ

Transliteration: (Innal lazeena kafaroo yunaadawna lamaqtul laahi akbaru mim maqtikum anfusakum iz tud'awna ilal eemaani fatakfuroon)

बेशक जिन्होंने कुफ़्र किया उन्हें पुकार कर कहा जाएगा [27]: 'यक़ीनन आज तुम्हारा अपनी जानों से नफ़रत करना [28], अल्लाह की उस सख़्त बेज़ारी के मुक़ाबले में बहुत कम है जो उस वक़्त थी जब तुम्हें ईमान की तरफ़ बुलाया जाता था तो तुम कुफ़्र करते थे [29] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 10

"बेशक जिन्होंने कुफ़्र किया उन्हें पुकार कर कहा जाएगा [27]: 'यक़ीनन आज तुम्हारा अपनी जानों से नफ़रत करना [28], अल्लाह की उस सख़्त बेज़ारी के मुक़ाबले में बहुत कम है जो उस वक़्त थी जब तुम्हें ईमान की तरफ़ बुलाया जाता था तो तुम कुफ़्र करते थे [29] ।'"

[27] महशर में काफ़िरों की रुसवाई का ऐलान

क़ियामत के दिन काफ़िरों के कुफ़्र और जुर्म का भरी महफ़िल में ऐलान किया जाएगा ताकि उनकी रुसवाई और ज़िल्लत तमाम कायनात के सामने ज़ाहिर हो।

[28] काफ़िरों की अपनी जानों से नफ़रत

जहन्नम का अज़ाब देखकर काफ़िर अपनी ही जानों और अपने बातिल फ़ैसलों पर लानत भेजेंगे और ख़ून के आँसू रोएंगे।

[29] ग़ज़ब-ए-इलाही की शिद्दत

उन्हें बताया जाएगा कि दुनिया में जब रसूल तुम्हें ईमान और तौहीद की तरफ़ बुलाते थे और तुम तकब्बुर से ठुकराते थे, उस वक़्त अल्लाह तआला की बेज़ारी और ग़ज़ब तुम्हारी आज की अपनी जान से नफ़रत से कहीं ज़्यादा था।

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