कुरान - 40:9 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَقِهِمُ ٱلسَّيِّـَٔاتِۚ وَمَن تَقِ ٱلسَّيِّـَٔاتِ يَوۡمَئِذٖ فَقَدۡ رَحِمۡتَهُۥۚ وَذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ

Transliteration: (Wa qihimus saiyi-aat; wa man taqis saiyi-aati Yawma'izin faqad rahimtah; wa zaalika huwal fawzul 'azeem (section 1))

'और उन्हें बुराइयों (की सज़ा) से बचा ले [25], और जिसे तूने उस दिन बुराइयों से बचा लिया तो बेशक तूने उस पर रहमत फ़रमाई, और यही बहुत बड़ी कामयाबी है [26] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 9

"'और उन्हें बुराइयों (की सज़ा) से बचा ले [25], और जिसे तूने उस दिन बुराइयों से बचा लिया तो बेशक तूने उस पर रहमत फ़रमाई, और यही बहुत बड़ी कामयाबी है [26] ।'"

[25] क़ियामत की आफ़तों से हिफ़ाज़त

फ़रिश्ते दुआ करते हैं कि मोमिनीन को क़ियामत की रुसवाई, गुनाहों के वबाल और जहन्नम के अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा ले।

[26] फ़ौज़-ए-अज़ीम (सबसे बड़ी कामियाबी)

क़ियामत के दिन दोज़ख़ से बच जाना और अल्लाह की रहमत का साया पाकर जन्नत में दाख़िल हो जाना ही इंसान की सबसे बड़ी और हक़ीक़ी कामयाबी है।

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