कुरान - 40:12 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
ذَٰلِكُم بِأَنَّهُۥٓ إِذَا دُعِيَ ٱللَّهُ وَحۡدَهُۥ كَفَرۡتُمۡ وَإِن يُشۡرَكۡ بِهِۦ تُؤۡمِنُواْۚ فَٱلۡحُكۡمُ لِلَّهِ ٱلۡعَلِيِّ ٱلۡكَبِيرِ

Transliteration: (Zaalikum bi annahooo izaa du'iyal laahu wahdahoo kafartum wa iny yushrak bihee tu'minoo; falhukmu lillaahil 'Aliyyil Kabeer)

यह (अज़ाब) इसलिए है कि जब अकेले अल्लाह को पुकारा जाता था तो तुम इनकार करते थे [32], और जब उसके साथ किसी को शरीक ठहराया जाता तो तुम मान लेते थे [33]; तो अब हुक्म अल्लाह ही का है जो सबसे बुलंद, सबसे बड़ा है [34] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 12

"यह (अज़ाब) इसलिए है कि जब अकेले अल्लाह को पुकारा जाता था तो तुम इनकार करते थे [32], और जब उसके साथ किसी को शरीक ठहराया जाता तो तुम मान लेते थे [33]; तो अब हुक्म अल्लाह ही का है जो सबसे बुलंद, सबसे बड़ा है [34] ।"

[32] तौहीद से नफ़रत का अंजाम

काफ़िरों की बदबख़्ती यह थी कि जब अल्लाह की वहदानियत बयान की जाती तो वे मुंह फेर लेते और बग़ावत पर उतर आते थे।

[33] शिर्क पर ख़ुशी

और जब बुतों और झूठे माबूदों का ज़िक्र होता तो वे ख़ुशी से झूम उठते थे। यह उनका खुला शिर्क और कुफ़्र था।

[34] अल-अलिय्युल-कबीर—अल्लाह ही का हुक्म

क़ियामत के दिन तमाम बादशाही और मुतलक़ फ़ैसला सिर्फ़ अल्लाह ही के दस्ते-क़ुदरत में है जो सबसे बुलंद और सबसे बड़ा है।

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