कुरान - 40:17 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
ٱلۡيَوۡمَ تُجۡزَىٰ كُلُّ نَفۡسِۭ بِمَا كَسَبَتۡۚ لَا ظُلۡمَ ٱلۡيَوۡمَۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ

Transliteration: (Al-Yawma tujzaa kullu nafsim bimaa kasabat; laa zulmal Yawm; innal laaha saree'ul hisaab)

आज हर जान को उसकी कमाई का बदला दिया जाएगा [44]; आज किसी पर कोई ज़ुल्म नहीं [45]; बेशक अल्लाह जल्द हिसाब लेने वाला है [46] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 17

"आज हर जान को उसकी कमाई का बदला दिया जाएगा [44]; आज किसी पर कोई ज़ुल्म नहीं [45]; बेशक अल्लाह जल्द हिसाब लेने वाला है [46] ।"

[44] आमाल का मुकम्मल बदला

नेकी का पूरा सिला और गुनाह की पूरी सज़ा दी जाएगी। मोमिनों की तौबा और अल्लाह का फ़ज़्ल उनके गुनाहों को माफ़ फ़रमा देगा।

[45] बेऐब अदल व इंसाफ़

किसी बेगुनाह को सज़ा नहीं दी जाएगी और किसी की नेकी घटाई नहीं जाएगी।

[46] सरीउल-हिसाब

अल्लाह तआला तमाम कायनात का हिसाब इतनी तेज़ी से पूरा फ़रमाएगा कि रिवायत के मुताबिक़ चंद लम्हों या चार घंटे में हिसाब मुकम्मल हो जाएगा, और बाक़ी वक़्त हुज़ूर ﷺ की शान-ए-शफ़ाअत और मक़ाम-ए-महमूद के ज़हूर के लिए होगा।

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