Transliteration: (Wa qaala Fir'awnu zarooneee aqtul Moosaa walyad'u Rabbahoo inneee akhaafu ai yubaddila deenakum aw ai yuzhira fil ardil fasaad)
"और फ़िरऔन ने कहा [63]: 'मà¥à¤à¥‡ छोड़ो कि मैं मूसा को क़तà¥à¤² कर दूठऔर वह अपने रब को पà¥à¤•ार ले [64]; मà¥à¤à¥‡ डर है कि वह तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ दीन बदल देगा [65] या मà¥à¤²à¥à¤• में फ़साद बरपा कर देगा [66] ।'"
'मà¥à¤à¥‡ छोड़ो' कहकर फ़िरऔन अपने दरबारियों पर यह ज़ाहिर करना चाहता था कि वह ख़à¥à¤¦ रà¥à¤• रहा है, जबकि हक़ीक़त में वह हज़रत मूसा अलैहिसà¥à¤¸à¤²à¤¾à¤® की हैबत और उनके मोजिज़ात से अंदर से थर-थर काà¤à¤ª रहा था।
उसने हज़रत मूसा अलैहिसà¥à¤¸à¤²à¤¾à¤® के रब को पà¥à¤•ारने का तंज़िया ज़िकà¥à¤° किया ताकि अपने दरबारियों को मà¥à¤¤à¤®à¤‡à¤¨ कर सके।
फ़िरऔन को डर था कि मूसा अलैहिसà¥à¤¸à¤²à¤¾à¤® लोगों को उसकी à¤à¥‚ठी ख़à¥à¤¦à¤¾à¤ˆ की इबादत से हटाकर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ वाहिद की परसà¥à¤¤à¤¿à¤¶ पर लगा देंगे।
हर ज़माने के ज़ालिम हà¥à¤•à¥à¤®à¤°à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ का यही तरीक़ा रहा है कि वे इसà¥à¤²à¤¾à¤¹ और हक़ की दावत को 'फ़साद' और 'बग़ावत' का नाम देकर दबाना चाहते हैं।
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