कुरान - 40:26 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
وَقَالَ فِرۡعَوۡنُ ذَرُونِيٓ أَقۡتُلۡ مُوسَىٰ وَلۡيَدۡعُ رَبَّهُۥٓۖ إِنِّيٓ أَخَافُ أَن يُبَدِّلَ دِينَكُمۡ أَوۡ أَن يُظۡهِرَ فِي ٱلۡأَرۡضِ ٱلۡفَسَادَ

Transliteration: (Wa qaala Fir'awnu zarooneee aqtul Moosaa walyad'u Rabbahoo inneee akhaafu ai yubaddila deenakum aw ai yuzhira fil ardil fasaad)

और फ़िरऔन ने कहा [63]: 'मुझे छोड़ो कि मैं मूसा को क़त्ल कर दूँ और वह अपने रब को पुकार ले [64]; मुझे डर है कि वह तुम्हारा दीन बदल देगा [65] या मुल्क में फ़साद बरपा कर देगा [66] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 26

"और फ़िरऔन ने कहा [63]: 'मुझे छोड़ो कि मैं मूसा को क़त्ल कर दूँ और वह अपने रब को पुकार ले [64]; मुझे डर है कि वह तुम्हारा दीन बदल देगा [65] या मुल्क में फ़साद बरपा कर देगा [66] ।'"

[63] फ़िरऔन का ज़ाहिरी रोअब और बातिनी ख़ौफ़

'मुझे छोड़ो' कहकर फ़िरऔन अपने दरबारियों पर यह ज़ाहिर करना चाहता था कि वह ख़ुद रुक रहा है, जबकि हक़ीक़त में वह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की हैबत और उनके मोजिज़ात से अंदर से थर-थर काँप रहा था।

[64] क़त्ल की गीदड़-भभकी

उसने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के रब को पुकारने का तंज़िया ज़िक्र किया ताकि अपने दरबारियों को मुतमइन कर सके।

[65] दीन बदलने का ख़ौफ़

फ़िरऔन को डर था कि मूसा अलैहिस्सलाम लोगों को उसकी झूठी ख़ुदाई की इबादत से हटाकर अल्लाह वाहिद की परस्तिश पर लगा देंगे।

[66] हक़ को फ़साद का नाम देना

हर ज़माने के ज़ालिम हुक्मरानों का यही तरीक़ा रहा है कि वे इस्लाह और हक़ की दावत को 'फ़साद' और 'बग़ावत' का नाम देकर दबाना चाहते हैं।

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