कुरान - 40:27 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَقَالَ مُوسَىٰٓ إِنِّي عُذۡتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُم مِّن كُلِّ مُتَكَبِّرٖ لَّا يُؤۡمِنُ بِيَوۡمِ ٱلۡحِسَابِ

Transliteration: (Wa qaala Moosaaaa innee 'uztu bi Rabbee wa Rabbikum min kulli mutakabbiril laayu'minu bi Yawmil Hisaab (section 3))

और मूसा ने फ़रमाया [67]: 'मैं अपने रब और तुम्हारे रब की पनाह लेता हूँ हर उस तकब्बुर करने वाले से जो हिसाब के दिन पर ईमान नहीं रखता [68] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 27

"और मूसा ने फ़रमाया [67]: 'मैं अपने रब और तुम्हारे रब की पनाह लेता हूँ हर उस तकब्बुर करने वाले से जो हिसाब के दिन पर ईमान नहीं रखता [68] ।'"

[67] हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का कमाल-ए-तवक्कुल

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन की धमकी का जवाब किसी ख़ौफ़ या जज़्बात से नहीं, बल्कि अपने रब की पनाह और कामिल भरोसे से दिया।

[68] मुतकब्बिरों के शर से हिफ़ाज़त की दुआ

जो शख़्स आख़िरत और क़ियामत के हिसाब पर ईमान नहीं रखता, वह हर ज़ुल्म कर गुज़रता है। ऐसे सरकश ज़ालिमों के शर से अल्लाह की पनाह मांगना सुन्नत-ए-अंबिया है।

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