कुरान - 11:69 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
وَلَقَدۡ جَآءَتۡ رُسُلُنَآ إِبۡرَٰهِيمَ بِٱلۡبُشۡرَىٰ قَالُواْ سَلَٰمٗاۖ قَالَ سَلَٰمٞۖ فَمَا لَبِثَ أَن جَآءَ بِعِجۡلٍ حَنِيذٖ

Transliteration: (Wa laqad jaaa'at Rusulunaaa Ibraaheema bilbushraa qaaloo salaaman qaala salaamun famaa labisa an jaaa'a bi'ijlin haneez)

और बेशक हमारे फ़रिश्ते इब्राहीम के पास ख़ुशख़बरी लेकर आए। उन्होंने कहा, 'सलाम' [143]। इब्राहीम ने कहा, 'सलाम' [144], फिर थोड़ी ही देर में एक भुना हुआ बछड़ा ले आए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 69 की तफ़्सीर

✅ [143] फ़रिश्तों की आमद और सलाम

हज़रत जिब्रील, मीकाईल और इसराफ़ील इंसानी शक्ल में हज़रत इब्राहीम (अलै.) के पास हज़रत इस्हाक़ और याक़ूब (अलै.) की पैदाइश की बशारत लेकर आए और सलाम अर्ज़ किया।

✅ [144] मेहमान नवाज़ी का नबवी तरीक़ा

हज़रत इब्राहीम (अलै.) ने सलाम का बेहतर जवाब दिया और फ़ौरन मेहमानों की ख़ातिर भुना हुआ बछड़ा पेश फ़रमाया। इससे मेहमान की फ़ौरी इज़्ज़त व ख़िदमत का सुन्नत होना साबित होता है।

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