कुरान - 11:68 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
كَأَن لَّمۡ يَغۡنَوۡاْ فِيهَآۗ أَلَآ إِنَّ ثَمُودَاْ كَفَرُواْ رَبَّهُمۡۗ أَلَا بُعۡدٗا لِّثَمُودَ

Transliteration: (Ka al lam yaghnaw feehaaa; alaaa inna Samooda kafaroo Rabbahum; alaa bu'dal li Samood.)

गोया वे कभी वहाँ बसे ही न थे। सुन लो! बेशक समूद ने अपने रब का इनकार किया [142]। सुन लो! दूर हों समूद! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 68 की तफ़्सीर

✅ [142] रसूल का इनकार रब का इनकार है

समूद ने अपने नबी की नाफ़रमानी करके अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, जिसके नतीजे में उनका नामो-निशान ऐसे मिटा दिया गया जैसे वे कभी वहां आबाद ही न थे।

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