कुरान - 11:66 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
فَلَمَّا جَآءَ أَمۡرُنَا نَجَّيۡنَا صَٰلِحٗا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ بِرَحۡمَةٖ مِّنَّا وَمِنۡ خِزۡيِ يَوۡمِئِذٍۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلۡقَوِيُّ ٱلۡعَزِيزُ

Transliteration: (Falammaa jaaa'a amrunaa najjainaa Saalihanw wal lazeena aamanoo ma'ahoo birahmatim minnaa wa min khizyi Yawmi'iz inna Rabbaka Huwal Qawiyyul 'Azeez)

फिर जब हमारा हुक्म आ पहुंचा, तो हमने अपनी ख़ास रहमत से सालेह को और उनके साथ ईमान लाने वालों को बचा लिया [140], और उस दिन की रुसवाई से (महफ़ूज़ रखा)। बेशक आपका रब ही ज़बरदस्त, ग़ालिब ताक़तवर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 66 की तफ़्सीर

✅ [140] अहले ईमान की बा-इज़्ज़त नजात

अल्लाह तआला ने हज़रत सालेह (अलै.) और उनके मोमिन साथियों को अपनी रहमत से सलामत रखा और उन्हें उस दिन की रुसवाई व हलाकत से बचाकर महफ़ूज़ मक़ाम पर पहुंचा दिया।

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