कुरान - 11:64 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
وَيَٰقَوۡمِ هَٰذِهِۦ نَاقَةُ ٱللَّهِ لَكُمۡ ءَايَةٗۖ فَذَرُوهَا تَأۡكُلۡ فِيٓ أَرۡضِ ٱللَّهِۖ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٖ فَيَأۡخُذَكُمۡ عَذَابٞ قَرِيبٞ

Transliteration: (Wa yaa qawmi haazihee naaqatul laahi lakum aayatan fazaroohaa taakul feee ardil laahi wa laa tamassoohaa bisooo'in fa yaakhuzakum azaabun qareeb)

'और ऐ मेरी क़ौम! यह अल्लाह की ऊँटनी तुम्हारे लिए एक निशानी (मोजिज़ा) है [136]। पस इसे छोड़ दो कि अल्लाह की ज़मीन में चरती फिरे, और इसे किसी बुराई (तकलीफ़) के साथ हाथ न लगाना [137], वरना तुम्हें बहुत जल्द आने वाला अज़ाब पकड़ लेगा।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 64 की तफ़्सीर

✅ [136] अल्लाह की ऊंटनी: अज़ीम मोजिज़ा

यह ऊंटनी क़ौम के मुतालिबे पर चट्टान फाड़कर एक मोजिज़े के तौर पर ज़ाहिर हुई थी, इसलिए इसे 'नाक़ातुल्लाह' (अल्लाह की ऊंटनी) कहा गया।

✅ [137] मोजिज़े का एहतराम और अज़ाब की चेतावनी

हज़रत सालेह (अलै.) ने ताकीद फ़रमाई कि इस ऊंटनी को कोई नुक़सान न पहुंचाया जाए, वरना क़रीब का अज़ाब उन पर टूट पड़ेगा।

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