कुरान - 11:63 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
قَالَ يَٰقَوۡمِ أَرَءَيۡتُمۡ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّي وَءَاتَىٰنِي مِنۡهُ رَحۡمَةٗ فَمَن يَنصُرُنِي مِنَ ٱللَّهِ إِنۡ عَصَيۡتُهُۥۖ فَمَا تَزِيدُونَنِي غَيۡرَ تَخۡسِيرٖ

Transliteration: (Qaala yaa qawmi ara'aytum in kuntu 'alaa baiyinatim mir Rabbee wa aataanee minhu rahmatan famai yansurunee minal laahi in 'asaituhoo famaa tazeedoonanee ghaira takhseer)

सालेह ने कहा, 'ऐ मेरी क़ौम! भला बताओ तो सही, अगर मैं अपने रब की तरफ़ से एक रौशन दलील पर हूँ [135] और उसने मुझे अपने पास से रहमत (नुबुव्वत) अता फ़रमाई है, फिर अगर मैं उसकी नाफ़रमानी करूँ तो अल्लाह के मुक़ाबले में मेरी कौन मदद करेगा? तो तुम तो मुझे नुक़सान के सिवा कुछ नहीं बढ़ा रहे हो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 63 की तफ़्सीर

✅ [135] रौशन दलील और नुबुव्वत की शान

हज़रत सालेह (अलै.) ने फ़रमाया कि मुझे अल्लाह ने बय्यिना (वाज़ेह मोजिज़ा) और नुबुव्वत अता फ़रमाई है; अगर मैं तुम्हारी ख़ुशनूदी के लिए हक़ की तबलीग़ छोड़ दूँ तो अल्लाह के अज़ाब से मुझे कौन बचाएगा? तुम्हारे कहने पर अमल करना सिवाए नुक़सान के कुछ नहीं।

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