कुरान - 11:61 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
۞وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ هُوَ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ وَٱسۡتَعۡمَرَكُمۡ فِيهَا فَٱسۡتَغۡفِرُوهُ ثُمَّ تُوبُوٓاْ إِلَيۡهِۚ إِنَّ رَبِّي قَرِيبٞ مُّجِيبٞ

Transliteration: (Wa ilaa Samooda akhaahum Saalihaa; qaala yaa qawmi' budul laaha maa lakum min ilaahim ghairuhoo Huwa ansha akum minal ardi wasta' marakum feehaa fastaghfiroohu summa toobooo ilaih; inna Rabbee Qareebum Mujeeb)

और समूद की तरफ़ उनके भाई सालेह को भेजा [127]। उन्होंने कहा, 'ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं। उसी ने तुम्हें ज़मीन से पैदा किया [128] और उसमें तुम्हें आबाद किया [129]। पस उससे मग़फ़िरत (माफ़ी) माँगो और उसकी तरफ़ तौबा करो [130]। बेशक मेरा रब क़रीब है, दुआएं क़बूल करने वाला है [131]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 61 की तफ़्सीर

✅ [127] क़ौमी रिश्ता और पैग़म्बरी

'भाई' से मुराद नसब और क़ौमी रिश्ता है कि हज़रत सालेह (अलै.) उसी क़बीले से थे ताकि वे उनके किरदार से बाख़बर हों।

✅ [128] मिट्टी से पैदाइश

इंसान की असल मिट्टी है क्योंकि आदम (अलै.) मिट्टी से बनाए गए और इंसान की ग़िज़ा भी ज़मीन ही से निकलती है।

✅ [129] ज़मीन में आबादकारी

अल्लाह ने तुम्हें ज़मीन पर ज़िंदगानी, मकान बनाने और बस्तियां बसाने की सलाहियत बख़्शी।

✅ [130] तौबा और इस्तिग़फ़ार

गुज़रे हुए गुनाहों पर शर्मिंदा होकर माफ़ी मांगना और आइंदा के लिए नेक राह इख़्तियार करना ही निजात का रास्ता है।

✅ [131] अल्लाह का क़ुर्ब और दुआ की क़बूलियत

अल्लाह तआला अपने बंदों के बेहद क़रीब है और सच्चे दिल से की गई हर दुआ को क़बूल फ़रमाता है।

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