कुरान - 11:60 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَأُتۡبِعُواْ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا لَعۡنَةٗ وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ أَلَآ إِنَّ عَادٗا كَفَرُواْ رَبَّهُمۡۗ أَلَا بُعۡدٗا لِّعَادٖ قَوۡمِ هُودٖ

Transliteration: (Wa utbi'oo fee haazihid dunyaa la'natanw wa Yawmal Qiyaamah; alaaa inna 'Aadan kafaroo Rabbahum; alaa bu'dal li 'Aadin qawmin Hood)

और इस दुनिया में भी उनके पीछे लानत लगा दी गई और क़ियामत के दिन भी [124]। सुन लो! यक़ीनन क़ौमे आद ने अपने रब से कुफ़्र किया [125]। सुन लो! दूर हो आद, हूद की क़ौम [126]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 60 की तफ़्सीर

✅ [124] दुनिया और आख़िरत की लानत

क़ौमे आद पर दुनिया में भी रुसवाई की लानत पड़ी कि तारीख़ में वे इब्रत की मिसाल बन गए, और क़ियामत के दिन भी उन पर अल्लाह की लानत होगी।

✅ [125] कुफ़्र की रुसवाई

अल्लाह की दी हुई बेपनाह ताक़त और दौलत के बावजूद उन्होंने अपने रब का इनकार किया।

✅ [126] रहमते इलाही से दूरी

'बुअ्दन लि-आद' का मतलब है कि वे अल्लाह की रहमत से हमेशा के लिए दूर और महरूम कर दिए गए।

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