कुरान - 11:58 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَلَمَّا جَآءَ أَمۡرُنَا نَجَّيۡنَا هُودٗا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ بِرَحۡمَةٖ مِّنَّا وَنَجَّيۡنَٰهُم مِّنۡ عَذَابٍ غَلِيظٖ

Transliteration: (Wa lammaa jaaa'a amrunaa najainaa Hoodanw wallazeena aamanoo ma'ahoo birahmatim minnaa wa najainaahum min 'azaabin ghaleez)

और जब हमारा हुक्म आ पहुंचा, तो हमने अपनी ख़ास रहमत से हूद को और उनके साथ ईमान लाने वालों को बचा लिया [121], और हमने उन्हें एक बड़े सख़्त अज़ाब से नजात दी [122]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 58 की तफ़्सीर

✅ [121] रहमते इलाही से अहले ईमान की नजात

जब क़ौमे आद पर सात रात और आठ दिन लगातार ख़ौफ़नाक आंधी का अज़ाब आया, तो अल्लाह ने हज़रत हूद (अलै.) और मोमिनीन को अपने फ़ज़्ल से सलामत रखा।

✅ [122] सख़्त अज़ाब से रिहाई

उस तेज़ और सर्द आंधी ने काफ़िरों को खजूर के खोखले तनों की तरह ज़मीन पर पटक कर हलाक कर दिया, जबकि मोमिन महफ़ूज़ रहे।

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