कुरान - 11:56 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
إِنِّي تَوَكَّلۡتُ عَلَى ٱللَّهِ رَبِّي وَرَبِّكُمۚ مَّا مِن دَآبَّةٍ إِلَّا هُوَ ءَاخِذُۢ بِنَاصِيَتِهَآۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: (Innee tawakkaltu 'alallaahi Rabbee wa Rabbikum; maa min daaabbatin illaa Huwa aakhizum binaasiyatihaa; inna Rabbee 'alaa Siraatim mustaqeem)

'बेशक मैंने अल्लाह पर भरोसा किया [117] जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। ज़मीन पर कोई चलने वाला ऐसा नहीं जिसकी पेशानी उसके क़ब्ज़े में न हो। बेशक मेरा रब सीधी राह पर है [118]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 56 की तफ़्सीर

✅ [117] अल्लाह पर कामिल भरोसा

हूद (अलै.) ने फ़रमाया कि मेरा तवक्कुल उस अल्लाह पर है जिसके क़ब्ज़े में कायनात की हर जान की लगाम है; कोई मख़लूक़ उसकी मर्जी के बग़ैर किसी को ज़र्रा बराबर नुक़सान नहीं पहुंचा सकती।

✅ [118] सीधे रास्ते पर होना: अदल व हिकमत

अल्लाह का तरीका अदल, इंसाफ़ और हिकमत पर मबनी है; वह नेककारों को ज़ाया नहीं फ़रमाता और ज़ालिमों को उनकी सरकशी का पूरा बदला देता है।

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