कुरान - 11:54 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
إِن نَّقُولُ إِلَّا ٱعۡتَرَىٰكَ بَعۡضُ ءَالِهَتِنَا بِسُوٓءٖۗ قَالَ إِنِّيٓ أُشۡهِدُ ٱللَّهَ وَٱشۡهَدُوٓاْ أَنِّي بَرِيٓءٞ مِّمَّا تُشۡرِكُونَ

Transliteration: (In naqoolu illa' taraaka ba'du aalihatinaa bisooo'; qaala inneee ushhidul laaha wash hadooo annee bareee'um mimmaa tushrikoon)

वे बोले, 'हम तो यही कहते हैं कि हमारे किसी माबूद ने तुम्हें कोई नुक़सान (पागलपन) पहुंचा दिया है [114]।' हूद ने कहा, 'मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो [115] कि मैं उन चीज़ों से बेज़ार हूँ जिन्हें तुम उसका शरीक ठहराते हो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 54 की तफ़्सीर

✅ [114] बुतों की नाराज़गी का बातिल वहम

काफ़िरों ने कहा कि शायद हमारे बुतों की शान में गुस्ताख़ी करने से तुम्हारी अक़्ल मारी गई है। मुशरिकीन हमेशा बुतों के झूठे ख़ौफ़ में मुब्तला रहते हैं।

✅ [115] नबी का बेख़ौफ़ ऐलान

हज़रत हूद (अलै.) ने बेधड़क फ़रमाया कि तुम्हारे ये बेजान बुत मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते; मैं अल्लाह को गवाह बनाकर तुम्हारे तमाम शिर्क से बेज़ारी का ऐलान करता हूँ।

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