कुरान - 11:52 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
وَيَٰقَوۡمِ ٱسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّكُمۡ ثُمَّ تُوبُوٓاْ إِلَيۡهِ يُرۡسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيۡكُم مِّدۡرَارٗا وَيَزِدۡكُمۡ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمۡ وَلَا تَتَوَلَّوۡاْ مُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Wa yaa qawmis taghfiroo Rabbakum summa toobooo ilaihi yursilis samaaa'a 'alaikum midraaranw wa yazidkum quwwatan ilaa quwwatikum wa laa tatawallaw mujrimeen)

'और ऐ मेरी क़ौम! अपने रब से मग़फ़िरत (माफ़ी) माँगो और उसकी तरफ़ तौबा करो। वह तुम पर मूसलाधार बारिश बरसाएगा [110] और तुम्हारी ताक़त पर ताक़त बढ़ाएगा [111]। और मुजरिम बनकर मुंह न मोड़ो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 52 की तफ़्सीर

✅ [110] इस्तिग़फ़ार से बारिश और शादाबी

क़ौमे आद पर क़हतसाली मुसल्लत थी। हूद (अलै.) ने फ़रमाया कि अगर तुम तौबा और इस्तिग़फ़ार करोगे तो अल्लाह आसमान से रहमत की बारिश बरसाएगा और तुम्हारी फ़सलें हरी-भरी हो जाएंगी।

✅ [111] क़ुव्वत व ताक़त में इज़ाफ़ा

इस्तिग़फ़ार की बरकत से इंसान की जिस्मानी, माली और औलाद की ताक़त में इज़ाफ़ा होता है। यह उसूल हर दौर के इंसानों के लिए क़ुरआन की अज़ीम बशारत है।

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