कुरान - 11:51 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
يَٰقَوۡمِ لَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ أَجۡرًاۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَى ٱلَّذِي فَطَرَنِيٓۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Yaa qawmi laaa as'alukum 'alaihi ajran in ajriya illaa 'alal lazee fataranee; afalaa ta'qiloon)

'ऐ मेरी क़ौम! मैं इस (तबलीग़) पर तुमसे कोई बदला नहीं मांगता। मेरा बदला तो सिर्फ़ उसी ज़ात के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया [109]। तो क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 51 की तफ़्सीर

✅ [109] बेग़रज़ दावत और ख़ुलूस

हज़रत हूद (अलै.) ने फ़रमाया कि मैं तुमसे कोई माल, हुकूमत या उजरत नहीं मांगता; मेरा सिला सिर्फ़ अल्लाह के पास है। सच्चा नबी वही होता है जिसका कोई दुनियावी मफ़ाद न हो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now